आज परमेश्वर की ख्वाईश क्या है ?

आज परमेश्वर की जो ख्वाईश है उसको ईश्वर पुत्र अरुण ने निम्न प्रकार से स्वर्णिम अक्षरों में वयान किया है :

(१) पौ  फटते ही मैं तुम्हारी  सहायता करूँ।

(२) जो अंत समय तक धीरज धरे उसीका मैं उद्धार करूँ।

(३) जिसकी लज्जा की चर्चा सारी  पृथ्वी पर फैली है उसकी प्रसंशा और कीर्ति मैं  सब जगह फैला दूँ। (more…)

आपका उद्धार कैसे होगा ?


मन सत्व, रज और तम गुणों का मिश्रण है। आपका उद्धार तभी हो सकता है जब आप तीनों गुणों का उल्लंघन कर देंगे। यह तब संभव हो सकता है जब आप सूरत शब्द योग के द्वारा कम से कम दसम द्वार को पार कर ऊपर उठें। क्योंकि दसम द्वार को पार करने पर ही Liberation Form Mind की स्थिति प्राप्त होती है। भँवर गुफा को पार कर जाने पर ही Complete Liberation Form Mind – Matter की स्थिति प्राप्त होती है। इसलिए आपका उद्धार तभी हो सकता है जब आप भँवर गुफा को पार कर सत लोक में आइए – ईश्वर पुत्र अरुण

परमेश्वेर की मनसा क्या है ? – ईश्वर पुत्र अरुण

परमेश्वेर की मनसा यह है कि जो लोग अन्त तक धीरज धरे रहेंगे उसी का उद्धार होगा। परमेश्वर जानते हैं कि अधर्म के बढ़ने से बहुत लोगों का प्रेम ठंढा हो जाएगा। इसलिए उन्होंने साफ – साफ लब्जों में कहा कि – “अधर्म के बढ़ने से प्रेम ठंढा हो जाएगा।परन्तु जो धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा।” (धर्मशास्त्र, मत्ती २४ :१३-१४)

परमेश्वऱ ने यह भी कहा कि “मेरे नाम के कारण सब लोग तुमसे बैर करेंगे पर जो अंत तक धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा।” (धर्मशास्त्र, मत्ती १०:२२) मैं तुमसे सच कहता हूँ कि संसार और उसकी अभिलाषाएँ दोनों मिट मिटजाएँगे पर जो परमेश्वेर की इच्छा पर चलेगा , वह सर्वदा बना रहेगा। (धर्मशास्त्र, (more…)

गुस्सा व क्रोध क्यों उत्पन्न होता है तथा क्रोध व गुस्सा पर नियंत्रण क्यों और कैसे करें ?

क्या आपने सोचा है कि आपके मन में गुस्सा व क्रोध क्यों उत्पन्न होता है ? क्या आपने कभी सोचा है कि क्रोध व गुस्सा आपके लिए हानिकारक है या लाभदायक ? यदि यह आपके लिए हानिकारक है तो क्या आप जानते हैं कि क्रोद्ध व गुस्सा पर नियंत्रण कैसे करें ? ? ?

तमो गुण बढ़ने से अहंकार और अज्ञान उत्पन्न होता है तथा सब प्रकार के भेद अहंकार से उत्पन्न होते हैं। भेद उत्पन्न होते ही लोग एक दूसरे से तुलना करने लगते हैं तथा दूसरे में कमी निकालने लगते हैं। कमी निकालनेवाले नजरिए की वजह से सभी में कमी निकालना एक स्वभाव सा बन जाता है। अज्ञानता के कारण ही लोगों में सही और गलत में फर्क नहीं कर पाता है। ऐसी अवस्था में व्यक्ति सच और झूठ में अंतर नहीं कर पाता है। ऐसे में व्यक्ति दूसरे पर दोषारोपण करने लगते हैं। दोषारोपण करने से क्रोध व गुस्सा उत्पन्न हो जाते हैं। (more…)

परमेश्वर कौन हैं और वे क्या कहना चाहते हैं ?

सृष्टि के आदि में केवल एक मात्र पूर्ण ब्रह्म ही थे जो प्रकाशित हो रहे थे। उस समय किसी भी चीजों की सृष्टि नहीं हुई थी। न दृश्य था और न द्रष्टा। न पृथ्वी बनी थी, न स्वर्ग और न आकाश। किसी भी चीजों की रचना नहीं हुई थी। पूर्ण ब्रह्म की इच्छा हुई की हम देखें और वे तीन भागों में विभक्त हो गए –

(१) जड़ प्रकृति / महा विष्णु (Lower Energy) (२) चेतन प्रकृति / गर्भोदकसाईविष्णु (Higher Energy) (3) परमेश्वर / पहिलौठा / क्षीरदाकोसाई विष्णु (Super Soul) (more…)