सच – ईश्वर पुत्र अरुण
परमेश्वर जानते हैं कि संसार तो पड़ेशानियों में आएगी। इसलिए परमेश्वर न तो आपको छोड़ेगा और न त्यागेगा। समस्या हर किसी के जीवन में आती है। समस्या यह नहीं जानती है कि आप धनि हैं या गरीब। समस्या यह नहीं जानती है कि आप किस जाती के हैं। समस्या यह नहीं जानती है कि आप कौन सी भाषा बोलते हैं। समस्या यह नहीं जानती है कि आप कौन से मजहब के हैं। इसलिए परमेश्वर आपसे पूछते हैं कि आपको क्या चाहिए ? आपने जिसको मदद की वे आपको भूल गए। आपने जिससे प्यार किया वे आपको भूल गए। आपने जिसको अपना कहा वे आपको भूल गए। आपके भाई आपको भूल गए। आपके रिस्तेदार आपको भूल गए लेकिन परमेश्वर ने कहा कि मैं तुम्हें नहीं भूलूंगा। चाहे माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए परन्तु मैं तुमको नहीं भूलूंगा।
हे भयभीत लोगों !
कलियुग में लोगों का उद्धार न तो राम नाम से होगा और न कृष्ण नाम से। द्वापर युग में भगवान कृष्ण पृथ्वी का परित्याग करने से पहले कहे कि – ” आज से सातवें दिन नई द्वारिका पानी में डूब जायगा।जिस क्षण मैं मर्त्य लोक का परित्याग कर दूंगा उसी क्षण इसके सारे मंगल नष्ट हो जायेंगे और थोड़े ही दिनों में पृथवी पर कलियुग का बोलबाला हो जायेगा। जब मैं पृथ्वी का त्याग कर दूँ तब तुम इस पर मत रहना क्योंकि कलियुग में अधिकांश लोगों की रूचि अधर्म में ही होगा।” (श्रीमद भागवतम महा पुराण ११;७:४-५ )
आशीर्वाद “अच्छा होने और ख़ुशी” का एक वयान है जो की दूसरे के लिए कहा जाता है जिसका संबन्द्ध उच्चरित किये गए अच्छे कामनाओं भरी शब्दों को पूरा होना है। परमेश्वर की मूल योजना यह थी कि उनकी सभी रचनाओं और मनुष्यों की उन्नति, शांति और सभी कामनाओं की पूर्ति हो परन्तु परमेश्वर की वह मूल योजना नष्ट हो गई जब संसार में पाप ने प्रवेश किया। वास्तव में आशीर्वाद का वयान परमेश्वर की कामना है जिसका अर्थ है उसके लिए अच्छाई को पुनः स्थापित करना या उसके अच्छाई के लिए घोषणा करना। वह परम आशीर्वाद यह है कि परमेश्वर आपको नया जीवन दिए हैं और उन्होंने आपके सभी गलतियों को माफ किये हैं जो कि ईश्वर पुत्र में विश्वास करने के कारण मिला है।