सच – ईश्वर पुत्र अरुण

परमेश्वर जानते हैं कि संसार तो पड़ेशानियों में आएगी। इसलिए परमेश्वर न तो आपको छोड़ेगा और न त्यागेगा। समस्या हर किसी के जीवन में आती  है। समस्या यह नहीं जानती है कि आप धनि हैं या गरीब।  समस्या यह नहीं जानती है कि आप किस जाती के हैं। समस्या यह नहीं जानती है कि आप कौन सी भाषा बोलते हैं। समस्या यह नहीं जानती है कि आप कौन से मजहब के हैं। इसलिए परमेश्वर आपसे पूछते हैं कि आपको क्या चाहिए ? आपने जिसको मदद की वे आपको भूल गए। आपने जिससे प्यार किया वे आपको भूल गए। आपने जिसको अपना कहा वे आपको भूल गए। आपके भाई आपको भूल गए। आपके रिस्तेदार आपको भूल गए लेकिन परमेश्वर ने कहा कि मैं तुम्हें नहीं भूलूंगा। चाहे माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए परन्तु मैं तुमको नहीं भूलूंगा।

परमेश्वर की प्रतिज्ञा

हे भयभीत लोगों !

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो। उनसे न डर और न भयभीत हो। क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर है।  वह तुझे धोखा न देगा और न छोड़ेगा

– कल्कि महा अवतार ध्यान योग एवं मानव उत्थान समिति; पूठ खुर्द, दिल्ली -३९

लोगों का उद्धार किस नाम से होगा ?

कलियुग में लोगों का उद्धार न तो राम नाम से होगा और न कृष्ण नाम से। द्वापर युग में भगवान कृष्ण पृथ्वी का परित्याग करने से पहले कहे कि – ” आज से सातवें दिन नई द्वारिका पानी में डूब जायगा।जिस क्षण मैं मर्त्य लोक का परित्याग कर दूंगा उसी क्षण इसके सारे मंगल नष्ट हो जायेंगे और थोड़े ही दिनों में पृथवी पर कलियुग का बोलबाला हो जायेगा। जब मैं पृथ्वी का त्याग कर दूँ तब तुम इस पर मत रहना क्योंकि कलियुग में अधिकांश लोगों की रूचि अधर्म में ही होगा।” (श्रीमद भागवतम महा पुराण ११;७:४-५ )

जब अर्जुन गोपियों को लेकर नई द्वारिका छोर कर जारहे थे तब रास्ते में साधारण भील ने गोपियों को लूट लिया और अर्जुन कुछ भी नहीं कर सका। यही अर्जुन महाभारत युद्ध के समय कुरुक्षेत्र के मैदान में बड़े – बड़े वीर योद्धाओं को नष्ट नावूद कर दिया था और सबको पशीना छुड़ा दिया था ; वही अर्जुन आज साधारण भील से गोपियों की रक्षा नहीं कर सका। (more…)

उच्चरित आशीर्वाद की शक्ति

आशीर्वाद “अच्छा होने और ख़ुशी” का एक वयान है जो की दूसरे के लिए कहा जाता है जिसका संबन्द्ध उच्चरित किये गए अच्छे कामनाओं भरी शब्दों को पूरा होना है। परमेश्वर की मूल योजना यह थी कि उनकी सभी रचनाओं और मनुष्यों की उन्नति, शांति और सभी कामनाओं की पूर्ति हो परन्तु परमेश्वर की वह मूल योजना नष्ट हो गई जब संसार में पाप ने प्रवेश किया। वास्तव में आशीर्वाद का वयान परमेश्वर की कामना है जिसका अर्थ है उसके लिए अच्छाई को पुनः स्थापित करना या उसके अच्छाई के लिए घोषणा करना। वह परम आशीर्वाद यह है कि परमेश्वर आपको नया जीवन दिए हैं और उन्होंने आपके सभी गलतियों को माफ किये हैं जो कि ईश्वर पुत्र में विश्वास करने के कारण मिला है। (more…)