परमेश्वर किस प्रकार प्रसन्न होंगे ?

मनुष्य का परमेश्वर के ऊपर विशवास रखना तथा परमेश्वर का विश्वासयोग्य बनना ये ही मुख्य दो चीज हैं जिससे परमेश्वर को प्रसन्न किया जासकता है। परमेश्वर को प्रसन्न किये बिना उनसे कुछ भी प्राप्त नहीं किया जा सकता है। लोग तप करते हैं किस लिए ? परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए। लोग यज्ञ करते हैं किस लिए? परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए। लोग संकीर्तन करते हैं किस लिए? परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए। लोग दान हैं किस लिए ? परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए।लेकिन मनुष्य ने कभी भी यह खोज नहीं किया कि ईश्वर किस प्रकार प्रसन्न होंगे। उसने समाज में जो देखा, अपने पूर्वजों और बाप-दादाओं को जो करते देखा, उसी को एक मात्र उत्तम साधन मान लिया और वैसा ही करने लगा। उसने तत्वदर्शी ज्ञानी पुरुष से पूछना आवश्यक ही नहीं समझा जबकि परमेश्वर के बारे में ठीक – ठीक केवल तत्वदर्शी ज्ञानी पुरुष ही बता सकते हैं। (more…)

ईश्वर आपकी क्यों नहीं सुनते हैं ?

लोगों ने ईश्वर के साथ जो वाचा बाँधी थी (जो एग्रीर्मेंट किया था ) उसको तोड़ दिया। इसके कारण मनुष्य के जीवन और आराधना में लापरवाही और विकृति आगयी। लोग ईश्वर के शिक्षाओं के अनुकूल न जीकर ईश्वर को धोखा दे रहे हैं । इसलिए ईश्वर अपने लोगों का न्याय करने के लिए एक दिन निश्चित किया जिसको न्याय का दिन कहते हैं। न्याय का वह दिन प्रकट होने से पहले लोग अपने आप में सुधार कर ले इसके लिए मैं ईश्वर पुत्र अरुण सम्पूर्ण मानव जाति को सावधान करता हूँ। (more…)

राजाओं के राजा, देवों के देव कल्कि महा अवतार

कलियुग के ४,३२,००० वर्ष बितने के बाद भारत के पुण्य भूमि पर संभल ग्राम में पिता विष्णु यश, माता सुमति के घर ईश्वर ने कल्कि नाम से अवतार लया। वे आत्माएँ बहुत ही श्रेष्ट आत्मा हैं जो आज तक भगवान श्री कल्कि जी को देखने लिए जीवित हैं और वो आत्माएँ उससे भी श्रेष्ट आत्मा हैं जो भगवान कल्कि जी के चरणों में अपने आप को समर्पित करेंगे। दस मिनट (१० मिनट ) का भिडियो मैं आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ। आप इसको अवश्य देखें और अपना बिचार लिख कर भेजें। (more…)

परमेश्वर की क्या आज्ञा है ?

परमेश्वर चाहते हैं कि तुम परमेश्वर से ज्ञान और बुद्धि प्राप्त करो क्योंकि बुद्धि तेरी रक्षा करेगी। तुम बुद्धि से प्रीति रखो क्योंकि वह तेरा पहरा देगी। बुद्धि श्रेष्ट है इसलिए उसकी प्राप्ति के लिए यत्न करो । उसकी बड़ाई करो तो वह तुझको बढ़ाएगी। जब तू उससे लिपट जाओगे तब वह तेरी महिमा करेगी। वह तेरे सिर पर शोभायमान आभूषण बांधेगी। तू बुद्धि को प्राप्त करो और समझ को भी प्राप्त करो । उनको भूल न जाना और न परमेश्वर की बातों को छोरना। परमेश्वर ने तुझे बुद्धि का मार्ग बताया है और सिधाई के पथ पर चलाया है ताकि चलने में तुझे कोई रोक – टोक न हो, चाहे तू दौड़े तो भी ठोकर न खाये। आज्ञा तो दीपक है और शिक्षा ज्योति, और सिखाने वाले की डांट जीवन का मार्ग है। परमेश्वर ने कहा कि चुकि तू मेरा बहुत प्रिय है, इसलिए मैं तुझसे परम हितकारक वचन कहूँगा। जो बुद्धि को प्राप्त करता है वह अपने प्राण का प्रेमी ठहरता है और जो समझ को धरे हुए है उसका कल्याण होता है।

जो मनुष्य बुद्धि को धारण करता है वह विलम्ब से क्रोध करता है और वह जयजयकार पाकर आनन्दित होता है। हर बुद्धिमान स्त्री अपने घर को बनाती है और मूढ़ स्त्री उसको अपने हाथों से डाह देती है। बुद्धिमान अपने वचनों के द्वारा रक्षा पाते हैं। इसलिए तू बुद्धिमानों की संगति करो तो तू भी बुद्धिमान होजाअोगे । जो मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है, उसको वे बुद्धि, ज्ञान और आनंद देते हैं । परन्तु पापी को दुःख भरा काम ही देते हैं । यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो तो वह परमेश्वर से मांगे जो बिना उलाहना दिए सबको उदारता से देता है। परन्तु विश्वास से मांगो और कुछ संदेह न करो क्योंकि संदेह करने वाला समुद्र के लहरों के समान है जो हवा से बहती और उछलती है। हे मेरे भाई ! धोखा न खाओ क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर से ही मिलता है जिसमें न तो कोई परिवर्तन होसकता है और न अदल बदल। जो ऊपर से है वह सर्वोत्तम है और जो धरती का है वह नाशवान है। तुम अपना विश्वास अपने कर्मों के द्वारा दिखाओ ।

परमेश्वर आपके जीवन में देने वाली वस्तु का लिस्ट बनाये हैं

मनुष्य को उतपन्न करने से पहले परमेश्वर ने बहुत सारी चीजों की रचना की और उसे मनुष्य के आधीन कर दिया ताकि मनुष्य सुख से रहे। लेकिन परमेश्वर ने मनुष्य को रोते विलखते हुए देखा। उसने मनुष्य को आंशू बहाते हुए देखा। उसने मनुष्य को मृत्यु के वादियों से गुजरते हुए देखा। तब उन्होंने स्वयं को मनुष्य वेश में रचा और आपसे मिलने के लिए धरती पर आया। उन्होंने पुकार – पुकार कर कहा – तुम व्याकुल मत हो। तुम मेरा कहना मानो, मेरे पास आओ तो तुम जीवित रहोगे। मैंने तुम्हें रोने के लिए नहीं रचा। मैंने तुम्हें आंशू बहाने के लिए नहीं रचा। मैंने तुम्हें शोक करने के लिए नहीं रचा। मैं तुम्हारे शोक को आनंद में बदल दूंगा। (more…)