अन्त के दिनों में परमेश्वर अपनी आत्मा आप पर क्यों उड़ेलना चाहते हैं ?
परमेश्वर ने कहा कि अन्त के दिनों में मैं अपनी आत्मा सब मनुष्यों पर उड़ेलूंगा। (धर्मशास्त्र, प्रेरितों के काम २:१७) क्योंकि उस समय लोग निर्बुद्धि और आज्ञा को न मानने वाले हो जाएंगे, वे भ्रम में पर जाएँगे और तरह – तरह के अभिलाषाओं और सुखविलास के भोगी होजाएंगे। लोग सबको बदनाम करने वाले हो जाएंगे और झगड़ालू होजाएंगे। वे मूर्खता के विवादों, बैर विरोध और झगड़ों में व्यर्थ समय को वरवाद करेंगे। यहाँ तक कि लोग परमेश्वर के वचनों की निन्दा करने वाले हो जायेंगे। इसलिए परमेश्वर ने कहा कि अन्त के दिनों में मैं अपनी आत्मा सब मनुष्यों पर उड़ेलूंगा। तुम्हारे बेटे और तुम्हारी बेटियाँ भविष्यवाणी करेंगी, तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे और तुम्हारे पुरनिए स्वप्न देखेंगे। जब तुम्हारे अन्दरपरमेश्वर की आत्मा बसेंगे तब तुम शारीरिक दशा में नहीं बल्कि आत्मिक दशा में हो जाओगे। क्योंकि यदि किसी में परमेश्वर की आत्मा नहीं है तो वह परमेश्वर का जन नहीं है । जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं उनके लिए सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है।
क्योंकि जिसने परमेश्वर को पहले से जान लिया है उन्हें पहले से ठहराया भी है, उन्हें बुलाया भी है और उन्हें धर्मी भी ठहराया है और उन्हें महिमा भी दी है। महिमा मनुष्य के स्वयं के कामों के द्वारा नहीं मिलती है बल्कि महिमा परमेश्वर से मिलती है। (more…)
परमेश्वर ने जितने चीजों को बनाया उस सबको देखा कि सब अच्छा है किन्तु परमेश्वर की नजर में सभी रचनाओं में से सबसे अच्छी रचना मनुष्य था। परमेश्वर ने उस मनुष्य को आदम कहा। इसके बाद परमेश्वर ने सोचा कि आदम को अकेला रहना अच्छा नहीं है इसलिए उसके लिए मैं एक सहायक बनाऊँगा जो उससे मेल खाए। इसलिए परमेश्वर ने आदम का एक पंसुली निकाल कर उसमें मांस भर दिया और उसको स्त्री बना दिया और आदम के पास ले आया। आदम ने कहा कि चुकि यह मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे मांस का मांस है इसलिए इसका नाम नारी होगा। लेकिन परमेश्वर की नजर में जो परमेश्वर का सबसे अच्छी रचना थी उसने एक आजादी के लिए परमेश्वर की आज्ञा को तोड़ दिया। परमेश्वर की आज्ञा को तोड़ने के कारण ही मनुष्यों के ऊपर दुःख
भगवान कल्कि जी का भजन सुनें और उनके चरणों में आश्रय लें। भगवान कल्कि जी के चरणों में आश्रय लेने के लिए नाम दर्ज कराएँ।
परमेश्वर ने गीता ४:६ में कहा कि – अजन्मा और अविनाशीस्वरुप होते हुए भी तथा समस्त प्राणी का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योग माया से प्रकट हूँ। प्रश्न यह उठता है कि आखिर अवतार क्यों लेते हैं ? अवतार लेने के कई कारण हैं –