परमेश्वर के इच्छाओं के अनुसार क्यों चलो ?
जो मनुष्य परमेश्वर के इच्छाओं के अनुसार चलता है वह हमेशा जीवित रहता है। आज मैं आपको इस भूली हुई बातों को याद दिलाने आया हूँ। संसार से जो सुख आपको मिलता है वह टेम्प्रोरी सुख है। इस सत्य को याद रखना और दैनिक जीवन में इसको उतारना दोनों आवश्यक है। जो व्यक्ति सुनता तो है परन्तु दैनिक जीवन में इसको नहीं उतारता है उस सत्य को जानने से कोई लाभ नहीं होता है । यदि कोई मनुष्य सांसारिक सुख को त्याग कर परमेश्वर की इच्छाओं को पूरा करता है तो वह निश्चित ही अनंत जीवन के सुख को भोग पाएगा। (more…)
आज ९० % घरों में परमेश्वर की पूजा नहीं होती। लोग अपने जीवन में काम को ही महत्व देते हैं। वे बिना पूजा किये ही घर से बहार निकलते हैं और इसका परिणाम यह होता है कि कार्य स्थल पर उन्हें दिनभर बिलकुल अराजकता का सामना करना पड़ता है। उनकी मानसिक शांति भंग हो जाती है। उनके काम करने की इच्छा मर जाती है लेकिन घर गृहस्ती के बोझ तले दबा होने के कारण ऐसी विषम परिस्थितियों में भी उन्हें काम करना ही पड़ता है। जब वे थक कर चुड़ हुए घर में आते हैं तो घर के सदस्यों के बीच में करवाहट सुनने को मिलती है। घर के बच्चे माँ – बाप का कहना नहीं मानते जिसकारण नहीं चाहने के वावजूद भी बच्चों का जीवन बर्वाद होते हुए उन्हें देखना पड़ता है। अंत में उन्हें समझ में नहीं आता है कि क्या करें ? उनकी समस्याओं को बढ़ाने वाले लोगों की कमी नहीं है परन्तु उनकी समस्याओं को
जो मनुष्य परमेश्वर में अनन्य चित्त होकर सदा ही निरन्तर परमेश्वर को स्मरण करता है उस नित्य – निरन्तर परमेश्वर में युक्त हुए मनुष्य को परमेश्वर आसानी से प्राप्त हो जाते हैं। गीता ८:१४ में इस बात की घोषणा परमेश्वर ने अपने मुख से किया है।
ब्रह्म – ज्ञान सबसे हाइयेष्ट क्वालिटी का ज्ञान है। इसको जान लेने के बाद संसार में और कोई भी ज्ञान जानने के लिए शेष नहीं रह जाता है। ब्रह्म – ज्ञान सब विद्द्याओं का राजा, सब गोपनीयों का राजा, अति पवित्र, अति उत्तम, प्रत्यक्ष फल वाला, धर्मयुक्त, साधन करने में बड़ा सुगम और अविनाशी है। ब्रह्म-ज्ञान ही मोक्ष प्राप्ति का एक मात्र उपाय है। मोक्ष की प्राप्ति के लिए और दूसरा कोई उपाय नहीं है। ब्रह्म -ज्ञान कोई कर्म नहीं है। उस परब्रह्म को जानकर ही मनुष्य जन्म – मरण को लाँघ जाता है। ब्रह्म-ज्ञान व ब्रह्म -विद्द्या का मुख्य फल परब्रह्म की प्राप्ति है जो जन्म, जरा आदि विकारों को न प्राप्त होने वाला, अजर-अमर, समस्त पापों से रहित तथा कल्याणमय दिव्यगुणों से सम्पन्न है।