परमेश्वर ने आपको क्यों छोड़ दिया ?
तुमने बहुत पूजा किया। तुमने बहुत भजन गाया। तुम्हारे भजन में बहुत दर्द भरे हुए थे। तुम्हारा भजन मुझको बहुत अच्छा लगा। लेकिन सबाल यह उठता है कि क्या भगवान ने तुम्हारी सुनी या नहीं ? बहुत सारे भजन हमारे और आपके सामने है जिसको लोगों ने बड़ा प्रेम से गाया और समाज के बहुत लोगों ने उसे पसंद किया। अधिकतर भजन में ईश्वर के सामने लोगों ने प्रस्ताव रखा कि आप हमको भूल गए हैं, आप हमारी कब सुनेंगे, आप हमारी लाज बचाओ, बीच भँवर में पड़ा हूँ और कोई बचाने वाला नहीं है, हम मर रहे हैं, हमारी रक्षा करने आप कब आओगे इत्यदि – इत्यादि। इसका क्या अर्थ है ? आपका संबन्ध भगवन से टूट चुका है इसलिए तो आप भगवान के आगे इस तरह के भाव को प्रकट करते हो। (more…)
अनन्य भक्ति के द्वारा भगवान का प्रत्यक्ष दर्शन आप कर सकते हैं। (गीता ११:५४) लेकिन अनन्य भक्ति में प्रेम की मौजूदगी भी आवश्यक है। क्योंकि बिना प्रेम का भक्ति सिद्ध नहीं होती। भगवान को जो प्रेम से पुकारता है, उसके समक्ष वे अवश्य ही प्रकट होते हैं। भगवान का दर्शन प्राप्त करने के लिए ६ चीजों को अपनाना अनिवार्य है :
ईश्वर प्राप्ति के लिए ऋषियों ने संसार में अनेकों मार्ग प्रकट किए हैं, किन्तु वे सभी कष्ट दायक हैं और परिणाम में प्रायः स्वर्ग की ही प्राप्ति करने वाले हैं। अभी तक ईश्वर प्राप्ति कराने वाले मार्ग तो गुप्त ही रहे हैं। इसका उपदेश करने वाला पुरुष प्रायः भाग्य से ही मिलता है। (श्रीमद्भगवतम् महा पुराण , माहात्म्य, २ :५६ – ५८ ) वह पुरुष जो आज आपको उपदेश करने आया है वह ईश्वर पुत्र है। वह पुरुष जो आज आपको उपदेश करने आया है वह सृष्टि का पहला पुरुष है। वह पुरुष जो आज आपको उपदेश करने आया है वह परमेश्वर का पहला और एकलौता पुत्र है जिसको पहिलौठा भी कहते हैं। सम्पूर्ण सृष्टि की रचना से पहले वह उत्पन्न हुआ, वह अपने परम पिता की गोद में बैठा था, वह यह कहता है कि तुम केवल पूर्ण ब्रह्म की पूजा करो जो अगम्य ज्योति में रहते हैं,
परमेश्वर कल्कि नाम से भारत के पूण्य भूमि पर अवतरित हुए हैं। वे नहीं चाहते हैं कि लोग पाप में जिएँ इसलिए उन्होंने लोगों से कहा कि तुम पवित्र बनो क्योकि मैं पवित्र हूँ। यह स्पष्ट है कि लोगों के जीवन और अराधना में लापरवाही और विकृति आ गई है। याजक और जन – साधारण दोनों ही परमेश्वर के शिक्षा के अनुकूल जीवन न जी कर उन्हें धोखा दे रहे हैं। मनुष्यों ने परमेश्वर के साथ जो वाचा बाँधी थी (संकल्प किया था) उसको तोड़ दिया। इसलिए परमेश्वर ने मनुष्यों से स्पष्ट कहा कि तुम मेरे आज्ञाओं को मानना, मेरे आज्ञाओं का पालन करना और मेरे को अपवित्र न ठहराना क्योंकि मैं तुम्हारा पवित्र करने वाला हूँ।
परमेश्वर के हजारों आँखें हैं। परमेश्वर के हजारों कान हैं। सारी सृष्टि उन्हीं के अन्दर समाई हुई है और सभी जीवों में केवल उन्हीं एक परमात्मा की आत्मा बसती है। इसलिए आपके प्रत्येक दुःख – दर्द और प्रत्येक पड़ेशानी को वे जानते हैं। उनसे कोई भी चीज छिपी नहीं है। वे बहुत ही सामर्थ्यवान हैं। वे बहुत ही शक्तिशाली हैं । वे आपके दुखों को आनंद में बदल सकते हैं। वे आपके पड़ेशानियों को आनंद में बदल सकते हैं। वे आपके आँशुओं को आशीष की बरसात में बदल सकते हैं। वे परमेश्वर दुखी व्यक्ति को तुच्छ नहीं मानते और न उससे घृणा करते हैं और न वे उससे वे मुख छिपाते हैं पर जब किसी ने भी उनको पुकारा उनकी उन्होंने सुन ली। (धर्मशास्त्र, भजन संहिता २२ :२४ ) अब सबाल यह उठता है कि