सूरत शब्द योग में पाँच ब्रह्म में कौन – कौन से पाँच शब्द हैं ? – ईश्वर पुत्र अरुण

परमेश्वर की आत्मा पाँच ब्रह्म से होकर  मनुष्य के शरीर में उतरी उस समय पाँचों   ब्रह्म में पाँच भिन्न – भिन्न शब्द उत्पन्न हुए जो निम्न लिखित है :

अनामी                                  आदि सत / परम पुरुष

अगम                                    कार्य ब्रह्म

अलख                                    वैकुण्ठ

(१ ) ध्वन्यात्मक ॐ                      सत लोक    (१ ) वीणा / वैग पाईप 

(२) सोहम ब्रह्म                           भँवर गुफा   (२) वंशी  (more…)

सम्पूर्ण मानव जाति के लिए सन्देश

परमेश्वर कौन हैं ?

परमेश्वर सम्पूर्ण मानव जाति के रचैता हैं और वे आपसे बहुत प्यार करते हैं। आप सभी उनके द्वारा रचे गए हैं और वे आपके बारे में सब कुछ जानते हैं।

आपको परमेश्वर ने क्यों रचा ?

आप परमेश्वर के द्वारा इसलिए रचे गए ताकि आप परमेश्वर से सम्बन्ध बनाए रखें। परन्तु परमेश्वर की आज्ञा नहीं मानने के कारण वह बनाया गया सम्बन्ध टूट गया। उसी पाप के कारण आपने परमेश्वर की महिमा को खो दिया। (more…)

क्या आप परमेश्वर को आमने – सामने देखना चाहते हैं ?

धर्मशास्त्र के कुछ लेख कहते हैं कि परमेश्वर को कोई भी मनुष्य नहीं देख सकता है। धर्मशास्त्र, निर्गमन ३३:२० यह कहता है कि तुम मेरे मुख का दर्शन नहीं कर सकता क्योंकि मनुष्य मेरे मुख का दर्शन करके जीवित नहीं रह सकता और धर्मशास्त्र, उत्पत्ति १७:१ यह कहता है कि परमेश्वर अब्राहम को दर्शन दिया। धर्मशास्त्र, निर्गमन २४:१० और ११ यह कहता है कि इज्राएलियों ने परमेश्वर का दर्शन किया। यह दोनों बातें किस प्रकार सत्य हो सकता है ?

इसका मतलब यह है कि अनगिनत और लाखों करोड़ों लोगों ने परमेश्वर को देखने की कोशिशें की किन्तु वे असफल रहे। धर्मशास्त्र, यूहन्ना ५:३७ ; १ तीमुथियुस ६:१६; १ पतरस १:८ और १ यूहन्ना ४:१२ यह कहता है कि किसी ने भी परमेश्वर का रूप नहीं देखा।
परमेश्वर के रूप को नहीं देखने के निम्नलिखित मुख्य दो कारण थे – (more…)

परमेश्वर की चाहत – ईश्वर पुत्र अरुण

परमेश्वर जीव पर कृपा तो करते ही हैं किन्तु अज्ञानी जीव उसका दुरूपयोग करता है इसलिए वह दुष्ट बन जाता है । ज्ञान जब तक शब्दात्मक है, तब तक वह फल नहीं देता है। जब ज्ञान क्रियात्मक होगा तभी वह फल देगा। यह सच है कि परमेश्वर आपके जीवन को बदलना चाहते हैं, परमेश्वर आपके जीवन में दुःख को हटाकर खुशियाँ देना चाहते हैं, परमेश्वर आपके उदासी को हटाकर आनन्द देना चाहते हैं। आपने परमेश्वर को नहीं चुना है बल्कि परमेश्वर ने आपको चुना है, ताकि तुम बहुत फल लाओ। तुम डाली हो और परमेश्वर दाखलता हैं। जब तुम परमेश्वर से जुड़े रहोगे तब तुम बहुत खुशहाल रहोगे और बहुत फल लाओगे। जब तुम परमेश्वर से अलग हो जाओगे तब तुम नष्ट हो जाओगे। जैसे डाल पेड़ से अलग रहकर फल नहीं ला सकता बल्कि वह सुख जाता है। (more…)