आपकी जरूरत क्या है ?- ईश्वर पुत्र अरुण
मनुष्य के रहने के लिए परमेश्वर ने चार स्थान निर्धारित किया है – (१) अनामी – GOD SELF (2) सच्च खंड / अविनाशी लोक/अकाल (३) महा-काल देश और (४) काल देश / पिंड देश
चुनाव आपको करना है कि आपको किस देश में रहने की जरूरत है? आपको जिस देश में रहने की जरूरत है वही आपका लक्ष्य है और आप वहीँ जाएँगे ।
*अनामी जहाँ परमेश्वर स्वयं रहते है
*सच्च खंड / अविनाशी लोक :- इसमें तीन लोक हैं – (१) अगम (२) अलख (३) सतलोक
* महाकाल देश :- इसमें तीन लोक हैं – (१) भँवर गुफा / सोऽहं ब्रह्म/ निह अक्षर (२) महा -शून्य (३) शून्य / रारम ब्रह्म /अक्षर
*काल देश / काल का पिंजरा :- इसके तीनों लोक हैं। इसके तीनों लोक – (१) BRAHMAND (CAUSAL) ब्रह्माण्ड काउजयल / अति सूक्ष्म (2) SUBTLE सूक्ष्म (3) PIND (PHYSICAL) पिंड देश / शरीर
(१) BRAHMAND (CAUSAL) ब्रह्माण्ड काउजयल / अति सूक्ष्म:- इसमें में दो स्थान हैं – (१) दसम द्वार / क्षर (२) त्रिकुटी / माया ब्रह्म / ॐ कार
(2) SUBTLE सूक्ष्म:- इसमें में तीन स्थान हैं – (१) ज्योति निरंजन (२) सहस – दल – कँवल (३) तीसरी आँख THIRD EYE
(3) PIND (PHYSICAL) पिंड देश / शरीर
काल के इस पिंजरे में जीव आकर फस गया। काल ने इस पिंजरे में काम, क्रोध, लोभ और मोह का दाना डाल दिया है और जीव इसी दाने को चुगता रहता है। एक दिन काल आता है और इस जीव को निगल जाता है। अब चुनाव आपको करना है कि आपको किस देश में रहने की जरूरत है? आपको जिस देश में रहने की जरूरत है वही आपका लक्ष्य है। आप वहाँ जाने के लिए जतन कीजिये और आप वहीँ पहुँच जाएँगे ।
अनामी लोक में जाने के लिए सही मार्ग एवं दूरी
जब तक कोई व्यक्ति देह में रहता हैं तब तक वह परमेश्वर से अलग है क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं परन्तु विश्वास से चलते हैं। इसलिए आपको धीरज रखना चाहिए और देह से अलग हो कर परमेश्वर से अलग रहने की व्यव्यवस्था को उत्तम समझना चाहिए।
यह सच है कि तुम परमेश्वर को नहीं पूजते हो बल्कि परमेश्वर के चमत्कार को ही पूजते हो। परन्तु तुम अपने आपको मेंटली और इमोशनली तैयार करो क्योंकि मैं जो कहने जा रहा हूँ वह अप्रिय है और शायद मेरी बातों से तुम्हें सदमा पहुंचे । परमेश्वर की पसंद चमत्कार के द्वारा तुम्हारी आवश्यकताओं की पूर्ति करना नहीं है। चमत्कार प्राकृतिक कानूनों की स्वीकृति के रूप में है और स्वयं मेरे जीवन में बहुत से चमत्कार हुए हैं। मुझे इस बात का तनिक भी संदेह नहीं है कि परमेश्वर का चमत्कार एक घंटी की तरह है जिसके द्वारा परमेश्वर मनुष्यों को अपने पास बुलाते हैं। लेकिन, मुझे आप से यह पूछना है कि आप स्वस्थका होने का एक चमत्कार प्राप्त करना चाहेंगे अथवा स्वस्थ जीवन का आशीष प्राप्त कर जिन चाहेंगे। आप दिवालियापन से बाहर निकलना चाहेंगे अथवा धन प्राप्त करने का आशीष प्राप्त करना चाहेंगे। इन दोनों का जबाब बरा ही स्पष्ट है। अच्छा यह है कि पड़ेशानी नहीं आए जो कि आशीर्वाद में रहने का परिणाम है, उसकी तुलना में एक चमत्कार की आवश्यकता अच्छी नहीं है , जो उनमें से बाहर किया जाना है । चमत्कार से अच्छा परमेश्वर के आशीर्वाद में रहना है इसके मुख्य तीन कारण हैं :
हे पृथ्वी पर रहने वाले लोगों ! जो व्यक्ति परमेश्वर से प्रेम करता है उसको ही परमेश्वर अपना मान बैठते हैं। और परमेश्वर जिस व्यक्ति को अपना मान बैठते हैं वे केवल उसी व्यक्ति को ही अपना रूप दिखाते हैं। परमेश्वर आप लोगों के आगे केवल अपना नाम प्रकट किये हैं परन्तु अपना रूप प्रकट नहीं किए हैं। वे तो आप लोगों से अपना रूप छिपा लिए हैं। जब आप परमेश्वर की उपासना अनन्य भक्ति और अनन्य प्रेम के साथ करेंगे तो परमेश्वर आपको अपने रूप का दर्शन कराएँगे। क्योंकि अनन्य प्रेम – भक्ति वाले ज्ञानी पुरुष को परमेश्वर अत्यंत प्रिय है और परमेश्वर के लिए वह अनन्य प्रेम – भक्ति वाले ज्ञानी पुरुष अत्यंत प्रिय है।