अपने आपको चेक करो कि आप कहाँ हैं ? – ईश्वर पुत्र अरुण
REAL GOLOK DHAM ANAMI – ADI–SAT/PARAM – PURUSH
अनामी आदि-सत / परमपुरुष
AGAM LOKAM (Karya Brahm) अगम लोक
ALAKH LOKAM (Vaikunth) अलख लोक
REAL GOLOK DHAM ANAMI – ADI–SAT/PARAM – PURUSH
अनामी आदि-सत / परमपुरुष
AGAM LOKAM (Karya Brahm) अगम लोक
ALAKH LOKAM (Vaikunth) अलख लोक
परमेश्वर जीव पर कृपा तो करते ही हैं किन्तु अज्ञानी जीव उसका दुरूपयोग करता है इसलिए वह दुष्ट बन जाता है । ज्ञान जब तक शब्दात्मक है, तब तक वह फल नहीं देता है। जब ज्ञान क्रियात्मक होगा तभी वह फल देगा। यह सच है कि परमेश्वर आपके जीवन को बदलना चाहते हैं, परमेश्वर आपके जीवन में दुःख को हटाकर खुशियाँ देना चाहते हैं, परमेश्वर आपके उदासी को हटाकर आनन्द देना चाहते हैं। आपने परमेश्वर को नहीं चुना है बल्कि परमेश्वर ने आपको चुना है, ताकि तुम बहुत फल लाओ। तुम डाली हो और परमेश्वर दाखलता हैं। जब तुम परमेश्वर से जुड़े रहोगे तब तुम बहुत खुशहाल रहोगे और बहुत फल लाओगे। जब तुम परमेश्वर से अलग हो जाओगे तब तुम नष्ट हो जाओगे। जैसे डाल पेड़ से अलग रहकर फल नहीं ला सकता बल्कि वह सुख जाता है। (more…)
संसार में सबसे पहले प्रेम परमेश्वर ने मनुष्य से किया। इसलिए मनुष्य परमेश्वर से प्रेम करता है। (धर्मशास्त्र ,१ यूहन्ना ४:१९) देखो परमेश्वर ने मनुष्य से कैसा प्रेम किया है कि मनुष्य परमेश्वर की सन्तान कहलाते हैं । (धर्मशास्त्र ,१ यूहन्ना ३:१)परमेश्वर ने कहा कि मेरी आज्ञा यह है कि “जैसा मैंने तुमसे प्रेम किया वैसा ही प्रेम तुम भी एक दूसरे से करो। ” (धर्मशास्त्र , यूहन्ना १५:१२) इसलिए धर्मशास्त्र, १ यूहन्ना ४ : ७ – ८ में यह भविष्यवाणी किया गया है कि “हम आपस में प्रेम रखें क्योंकि परमेश्वर प्रेम से है और जो कोई प्रेम करता है वह परमेश्वर से जन्मा है और परमेश्वर को जानता है। जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता।” धर्मशास्त्र, १ यूहन्ना ४:१६ में प्रेम के विषय में यहाँ तक कहा गया है कि परमेश्वर प्रेम है और जो परमेश्वर में बना रहता है,परमेश्वर भी उसमें बना रहता है। (more…)
ANAMI – GOD SELF
अनामी आदि सत / परम पुरुष
AGAM – KARYA BRAHM
अगम कार्य ब्रह्म
ALAKH – VAIKUNTH
अलख वैकुण्ठ
Philosophy of God Realization Given by Ishwar Putra Arun
ईश्वर पुत्र अरुण के मतानुसार परमेश्वर के अनुभूति का सिद्धान्त (more…)