आप अपने जीवन में क्या चाहते हैं ? आशीर्वाद या चमत्कार ?
यह सच है कि तुम परमेश्वर को नहीं पूजते हो बल्कि परमेश्वर के चमत्कार को ही पूजते हो। परन्तु तुम अपने आपको मेंटली और इमोशनली तैयार करो क्योंकि मैं जो कहने जा रहा हूँ वह अप्रिय है और शायद मेरी बातों से तुम्हें सदमा पहुंचे । परमेश्वर की पसंद चमत्कार के द्वारा तुम्हारी आवश्यकताओं की पूर्ति करना नहीं है। चमत्कार प्राकृतिक कानूनों की स्वीकृति के रूप में है और स्वयं मेरे जीवन में बहुत से चमत्कार हुए हैं। मुझे इस बात का तनिक भी संदेह नहीं है कि परमेश्वर का चमत्कार एक घंटी की तरह है जिसके द्वारा परमेश्वर मनुष्यों को अपने पास बुलाते हैं। लेकिन, मुझे आप से यह पूछना है कि आप स्वस्थका होने का एक चमत्कार प्राप्त करना चाहेंगे अथवा स्वस्थ जीवन का आशीष प्राप्त कर जिन चाहेंगे। आप दिवालियापन से बाहर निकलना चाहेंगे अथवा धन प्राप्त करने का आशीष प्राप्त करना चाहेंगे। इन दोनों का जबाब बरा ही स्पष्ट है। अच्छा यह है कि पड़ेशानी नहीं आए जो कि आशीर्वाद में रहने का परिणाम है, उसकी तुलना में एक चमत्कार की आवश्यकता अच्छी नहीं है , जो उनमें से बाहर किया जाना है । चमत्कार से अच्छा परमेश्वर के आशीर्वाद में रहना है इसके मुख्य तीन कारण हैं : (more…)
हे पृथ्वी पर रहने वाले लोगों ! जो व्यक्ति परमेश्वर से प्रेम करता है उसको ही परमेश्वर अपना मान बैठते हैं। और परमेश्वर जिस व्यक्ति को अपना मान बैठते हैं वे केवल उसी व्यक्ति को ही अपना रूप दिखाते हैं। परमेश्वर आप लोगों के आगे केवल अपना नाम प्रकट किये हैं परन्तु अपना रूप प्रकट नहीं किए हैं। वे तो आप लोगों से अपना रूप छिपा लिए हैं। जब आप परमेश्वर की उपासना अनन्य भक्ति और अनन्य प्रेम के साथ करेंगे तो परमेश्वर आपको अपने रूप का दर्शन कराएँगे। क्योंकि अनन्य प्रेम – भक्ति वाले ज्ञानी पुरुष को परमेश्वर अत्यंत प्रिय है और परमेश्वर के लिए वह अनन्य प्रेम – भक्ति वाले ज्ञानी पुरुष अत्यंत प्रिय है।
परमेश्वर कौन हैं ?
धर्मशास्त्र के कुछ लेख कहते हैं कि परमेश्वर को कोई भी मनुष्य नहीं देख सकता है। धर्मशास्त्र, निर्गमन ३३:२० यह कहता है कि तुम मेरे मुख का दर्शन नहीं कर सकता क्योंकि मनुष्य मेरे मुख का दर्शन करके जीवित नहीं रह सकता और धर्मशास्त्र, उत्पत्ति १७:१ यह कहता है कि परमेश्वर अब्राहम को दर्शन दिया। धर्मशास्त्र, निर्गमन २४:१० और ११ यह कहता है कि इज्राएलियों ने परमेश्वर का दर्शन किया। यह दोनों बातें किस प्रकार सत्य हो सकता है ?