Author - Aadishri Arun

शांति कैसे मिलेगी ?

शांति कब प्राप्त होगी ? जब आपकी पड़ेशानी मिटा दी जाएगी, जब आपके दुखों को मिटा दी जाएगी, जब आपको विमारयों से मुक्त कर दिया जाएगा, जब आपके आँशू पोछ दिए जाएँगे। ऐसा कब होगा ? जब आप परमेश्वर के शरण में जायेंगे। क्योंकि परमेश्वर में सामर्थ्य है कि वे आपको दुखों से बहार निकाल देंगे । परमेश्वर में सामर्थ्य है कि वे आपको पड़ेशानी से बाहर निकल देंगे। परमेश्वर में सामर्थ्य है कि वे आपको विमारयों से मुक्त कर देंगे।परमेश्वर में सामर्थ्य है कि वे आपके सभी आँशुओं को पोछ देंगे। केवल जरूरत है आपको परमेश्वर के शरण में जाने की। आप परमेश्वर के राज्य की खोज करें क्योंकि परमेश्वर का राज्य खाना – पीना नहीं बल्कि धर्म, मिलाप और आनंद है जो पवित्र आत्मा से होता है। (more…)

भक्ति के साधन-ईश्वर पुत्र अरुण 

 

परमेश्वर ने गीता ११:५४ में कहा कि अनन्य भक्ति के द्वारा मुझको प्रत्यक्ष देखना संभव है; परन्तु प्रश्न यह उठता है कि अनन्य भक्ति के साधन क्या हैं  ?
अनन्य भक्ति के 6 साधन हैं :-
(1) प्रार्थना (2) पूजा (3) स्तुति (4) कीर्तन (5) कथा श्रवण (6) स्मरण
(1) प्रार्थना: प्रातः आँख खुलने पर परमेश्वर का स्मरण करो, उनको धन्यवाद दो और उनकी प्रशंसा करो लेकिन यह बिलकुल ही कामना रहित हो। (श्रीमद्भगवतम् महा पुराण ७;१०:९)
(2) पूजा: स्नानादि से निवृत होकर एकांत में कामना रहित पूजा करो और उनके स्वरुप का मनन करो। कामना पूर्ण करवाने वाले लोग तो लेन  – देन  करने वाला बनिया हैं। (more…)

आपकी जरूरत क्या है ?- ईश्वर पुत्र अरुण

मनुष्य के रहने के लिए परमेश्वर ने चार स्थान निर्धारित किया है – (१) अनामी – GOD SELF (2) सच्च खंड / अविनाशी लोक/अकाल (३) महा-काल देश और (४) काल देश / पिंड देश
चुनाव आपको करना है कि आपको किस देश में रहने की जरूरत है? आपको जिस देश में रहने की जरूरत है वही आपका लक्ष्य है और आप वहीँ जाएँगे ।
*अनामी जहाँ परमेश्वर स्वयं रहते है
*सच्च खंड / अविनाशी लोक :- इसमें तीन लोक हैं – (१) अगम (२) अलख (३) सतलोक
* महाकाल देश :- इसमें तीन लोक हैं – (१) भँवर गुफा / सोऽहं ब्रह्म/ निह अक्षर (२) महा -शून्य (३) शून्य / रारम ब्रह्म /अक्षर
*काल देश / काल का पिंजरा :- इसके तीनों लोक हैं। इसके तीनों लोक – (१) BRAHMAND (CAUSAL) ब्रह्माण्ड काउजयल / अति सूक्ष्म (2) SUBTLE सूक्ष्म (3) PIND (PHYSICAL) पिंड देश / शरीर
(१) BRAHMAND (CAUSAL) ब्रह्माण्ड काउजयल / अति सूक्ष्म:- इसमें में दो स्थान हैं – (१) दसम द्वार / क्षर (२) त्रिकुटी / माया ब्रह्म / ॐ कार
(2) SUBTLE सूक्ष्म:- इसमें में तीन स्थान हैं – (१) ज्योति निरंजन (२) सहस – दल – कँवल (३) तीसरी आँख THIRD EYE
(3) PIND (PHYSICAL) पिंड देश / शरीर

काल के इस पिंजरे में जीव आकर फस गया। काल ने इस पिंजरे में काम, क्रोध, लोभ और मोह का दाना डाल दिया है और जीव इसी दाने को चुगता रहता है। एक दिन काल आता है और इस जीव को निगल जाता है। अब चुनाव आपको करना है कि आपको किस देश में रहने की जरूरत है? आपको जिस देश में रहने की जरूरत है वही आपका लक्ष्य है। आप वहाँ जाने के लिए जतन कीजिये और आप वहीँ पहुँच जाएँगे ।

अनामी लोक में जाने के लिए मार्ग एवं दूरी – ईश्वर पुत्र अरुण

नामी लोक में जाने के लिए सही मार्ग एवं दूरी 
(191करोड़ 40 लाख योजन) 
[1 योजन = १२ किलो मीटर] 

१. (अनामी) – GOD SELF परमेश्वर के रहने का  स्थान 
      १०० करोड़ योजन 
२. (अगम)  – २ से ४ तक सच्च खंड; अविनाशी लोक  
      ५०  करोड़ योजन  
३.  (अलख)
       १८ करोड़ २५ लाख योजन  
४.   (सत लोक)  
        १२ करोड़ योजन 

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विश्वास में हम कैसे रहें – ईश्वर पुत्र अरुण

जब तक कोई व्यक्ति  देह में रहता  हैं तब तक वह परमेश्वर  से अलग है क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं परन्तु  विश्वास से चलते हैं। इसलिए आपको धीरज रखना चाहिए और देह से अलग हो कर परमेश्वर  से अलग रहने की व्यव्यवस्था को उत्तम समझना चाहिए।

“So, then, we are ever without fear, and though conscious that while we are in the body we are away from the Lord,(For we walk by faith, not by sight.) Yet–we are without fear, desiring to be freed from the body, and to be [forever] with the Lord. (more…)