परमेश्वर के दर्शन कैसे होंगे – ईश्वर पुत्र अरुण



परमेश्वर संभल ग्राम की भूमि पर अवतार लेकर आचुके हैं। आज वे आपके सभी दुखों को मिटाने के लिए तैयार हैं। आज वे आपको सभी विमारियों से मुक्त कर देना चाहते हैं। आज वे आपको सभी पड़ेशानियों से बहार निकल देना चाहते हैं। परमेश्वर कहते हैं की क्या मेरे लिए कोई भी काम कठिन है ? (धर्मशास्त्र, यिर्मयाह ३२:२७) उन्होंने विश्वास दिलाते हुए कहा कि जवान सिंहों को तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं ; परन्तु परमेश्वर के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होगी। (धर्मशास्त्र, भजन संहिता ३४:१०) परमेश्वर ने कहा कि कुम्हार की तरह तुम्हारे साथ क्या मैं भी काम नहीं कर सकता ?देख जैसा मिट्टी कुम्हार के हाथ में रहती है, ठीक वैसे ही तुम भी मेरे हाथ में हो। (धर्मशास्त्र, यिर्मयाह १८:६) क्या गढ़ी हुई वस्तु गढ़ने वाले से कह सकती है कि तू ने मुझे ऐसा क्यों बनाया है ? क्या कुम्हार को मिट्टी पर अधिकार नहीं कि एक ही लोदे में से एक बर्तन आदर के लिए और दूसरे को अनादर के लिए बनाए ? (more…)
काल एक निश्चित समय को कहते हैं। वह निश्चित समय पूरा होते ही वहाँ का सब कुछ समाप्त हो जाता है। काल देश में रचना का आधार है प्रकृति। प्रकृति ही सम्पूर्ण जगत को रचती है और प्रकृति ही सम्पूर्ण जगत का नाश करती है। गीता १४:३ में परमेश्वर ने कहा की मेरी महत् – ब्रह्म मूल – प्रकृति सम्पूर्ण भूतों (सृष्टयों) की योनि है अर्थात गर्भाधान का स्थान है और मैं उस योनि में चेतन समुदायरूप गर्भ को स्थापन करता हूँ। उस जड़ – चेतन के संयोग से सब भूतों (सृष्टयों) की उत्पत्ति होती है। भू, भुवः, स्वः (पृथ्वी, अंतरिक्ष और स्वर्ग) अर्थात पृथ्वी से लेकर ध्रुव लोक तक काल निर्मित देश है जो नाशवान है। इसलिए इस तीनों लोकों में से किसी भी लोक में मनुष्य रहे तो उसका नाश निशित ही है। स्वर्ग लोक से ऊपर केवल एक ही लोक महर्लोक है जो कल्प के अंत में जन-शून्य हो जाता है। (more…)