परमेश्वर तक हम कैसे पहुंचे – ईश्वर पुत्र अरुण
16 पौड़ी वाला सीढ़ी लगा कर हम परमेश्वर तक पहुंच सकते हैं
01. गुदा / मूलाधार चक्र Rectum – Root Chakra
02. लिंग / स्वाधितं चक्र Ling/Genital – Sacral Chakra
03. नाभि / मणि चक्र Navel – Solar Plexus
04. दिल या हर्ट / अनाहत चक्र Heart – Chakra
05. कण्ठ या गला / विशुद्धा चक्र Throat – Chakra
06. आज्ञा चक्र /अजना चक्र /तीसरी आँख/दसम द्वार / एक आँख
Aagya Chakra/Ajna Chakra/Third Eye / Tenth Door / Single eye
a. इडा, पिंगला, सुषम्ना जंक्शन (more…)

आज परमेश्वर मनुष्य शरीर धारण कर पृथवी पर कल्कि नाम से अवतरित हुए हैं। आज परमेश्वर आपके जीवन में प्रकाश बनकर उपस्थित हुए हैं। आज परमेश्वर आपके जीवन में ख़ुशी का फूल खिलाने आए हैं। आज परमेश्वर आपके जीवन के पथरीली, झाड़ी एवं चट्टानों से भरी भूमि को हरा – भरा बनाने आए हैं। आज परमेश्वर आपको दुःख, पड़ेशानी एवं मृत्यु से बचाने आए हैं। परमेश्वर के लिए न तो कोई कर्तव्य है और न उन्हें किसी चीजों को प्राप्त करने की जरूरत ही है। (गीता ३:२२) फिर भी परमेश्वर समय – समय पर अवतार लेकर संसार का हित करने के लिए सब कार्य करते हैं। जिस युग में जितना कार्य आवश्यक है, परमेश्वर उसी के अनुसार अवतार लेकर उस कार्य को पूरा करते हैं। श्रीमद्भगवतम् महा पुराण १०;३३:३७ में महर्षि वेद व्यास जी ने कहा कि “जीवों पर कृपा करने के लिए ही परमेश्वर अपने आपको मनुष्य रूप में प्रकट करते हैं और ऐसी – ऐसी लीलाएँ करते हैं जिन्हें सुनकर जीव भगवत्प्रायण हो जाय।”
प्रेम एक निर्मल झरना है । उसके प्रवाह में जो भी आ जाता है, वह निर्मल हो जाता है । जिस प्रकार पात्र और कुपात्र की घृणा जैसे झरने के स्वच्छ प्रवाह में नहीं होती है ठीक वैसे ही प्रेमी के अन्त़करण में किसी प्रकार की ईर्ष्या – द्वेष या घृणा की भावनायें नहीं होती । महात्मा गाँधी जी अपने आश्रम में अपने हाथों से एक कोढ़ी की सेवा-सुश्रुषा किया करते थे । इसमें उन्हें कभी भी घृणा पैदा नहीं होती थी । प्रेम की विशालता में ऊपर से जान पड़ने वाली मलीनतायें भी वैसे ही समा जाती हैं जैसे हमारी नदियों का कूड़ा कबाड़ समुद्र के गर्भ में विलीन हो जाता है । प्रेम आत्मा के प्रकाश से किया जाता है । आत्मा यदि मलीनताओं से ग्रसित है तो भी उसकी नैसर्गिक निर्मलता में अन्तर नहीं आता । यही समझकर उदारमनसे व्यक्ति अपनी सहानुभूति से किसी को भी वंचित नहीं करते ।