Author - Aadishri Arun

मुक्ति प्राप्ति के रहस्य

रहस्य का अर्थ होता है छिपा हुआ या गुप्त। यदि छिपा हुआ न हो तो रहस्य कहा ही न जायेगा। लोगों को मुक्ति क्यों नहीं मिलती है ? क्योंकि मुक्ति को प्राप्त करने का तरीका गुप्त है। हे भाई! देखो, नौका को तो जल में ही रहना है, किन्तु यदि जल नौका पर सवार हो जाय तो नौका डूब जाती है। ठीक उसी प्रकार मन को संसार में ही रहना है, किन्तु यदि मन को संसार के स्वरूप से हटा कर, मन को विषयों से हटा कर जब परमेश्वर में मिला दिया जाता है तो तभी मुक्ति मिल जाती है।

यदि सांसारिक वस्तु या सांसारिक रुप या सांसारिक विषय मन में आकर बैठ जाय तो मुक्ति कभी भी नहीं मिलेगी। जीवात्मा तन को छोड़ता है किन्तु वह मन को साथ ले चलता है। इसलिए मन को संभालो। पूर्व जन्म का शरीर तो मर गया है किन्तु मन नया शरीर लेकर आया है। शरीर तो मरता है किन्तु मन नहीं मरता है। (more…)

गुरु के बारे में वास्तविक सच क्या है ?

जो व्यक्ति पूर्व जन्म में अक्षय तप किया है, इस लोक में उसी को सच्चा गुरु मिलता है। ब्रह्म को प्राप्त करा देने वाला गुरु जन्मदाता माता – पिता से भी अधिक पूज्य है; क्योंकि पिता से प्राप्त जीवन तो नष्ट हो जाता है; परन्तु ब्रह्म रूप जन्म कभी भी नष्ट नहीं होता। ब्रह्मदत्त गुरु सबसे श्रेष्ट है। शिव के रुष्ट होने पर गुरु बचा लेते हैं; पर गुरु के रुष्ट होने पर शिव भी नहीं बचा पाते।सच्चाई यह है की जिसके द्वारा ब्रह्म विद्द्या का उपदेश होता है, वह परमेश्वर ही है ऐसा सभी धर्मशास्त्र कहता है। इस विद्द्या का बदला नहीं चुकाया जा सकता है। इसलिए गुरु के समीप शिष्य सदा ऋणी ही रहता है। जब गुरु प्रसन्न होते हैं तब वे खुद गुरु ऋण से शिष्य को मुक्त कर देते हैं; शिष्य गुरु ऋण को कभी भी चुकता नहीं कर सकता है। इसलिए तन – मन – वचन से सब प्रकार सदा तत्पर रहकर गुरु को संतुष्ट करना चाहिए। लेकिन गुरु वही सच्चा है जो अपने शिष्य को भगवान विष्णु का नाम दान में मन्त्र स्वरुप देता है। जो गुरु नाम-दान में भगवान विष्णु का नाम मन्त्र स्वरुप अपने शिष्य को दान के रूप में नहीं देता है वह शिष्यघाती है। (more…)

शान्ति का श्रोत क्या है ?

आज परमेश्वर कल्कि नाम से आपके बीच आये हैं। उनके आने का उद्देश्य क्या है ? आपको शान्ति देना। संसार जैसा शान्ति देता है वैसा शान्ति नहीं; ईश्वर आपको संसार के लोगों के जैसा शान्ति नहीं देंगे। इसलिए आपका मन व्याकुल न हो और आप न डरें। ईश्वर ने कहा कि मैं जानता हूँ कि जब आपके जीवन में दुःख – दर्द आता है, तब आप व्याकुल हो जाते हैं। जब आपके परिवार में विमारियां आती हैं तब आपका मन टूट जाता है। जब आप आर्थिक संकट में पड़ जाते हो तब आपका मन बौखला जाता है। इसलिए ईश्वर ने वादा किया कि जिस प्रकार माता अपने पुत्र को शान्ति देती है ठीक उसी प्रकार मैं भी तुम्हें शान्ति दूंगा। परमेश्वर ने कहा कि मैं तुम्हें ऐसा बोल और बुद्धि दूंगा कि तुम्हारे सब विरोधी मिल कर भी उसका सामना या खंडन न कर सकेंगे। (more…)

आज परमेश्वर ने आपको क्या आज्ञा दी है ?

परमेश्वर की इच्छा थी कि मनुष्य हमारी आज्ञा को माने इसलिए उन्होंने धर्मशास्त्र में यह लिखवाया कि यदि तुम मेरे वचन को मानो तब मैं तेरा परमेश्वर होऊंगा, जिस मार्ग पर चलने की मैं तुम्हें आज्ञा दूँ उसी मार्ग पर चलो तब तुम्हारा भला होगा।इसका कारण यह है कि परमेश्वर ने सारी सृष्टि को रचने के बाद अपने स्वरूप के अनुसार मनुष्य को नर और नारी करके रचा और उनको आशीष दिया। मनुष्य परमेश्वर से संपर्क बनाये रखे इसके लिए उन्होंने मनुष्य के लिए कुछ नियम बनाये। उनकी इच्छा थी कि नर और नारी दोनों हमारा कहना माने ताकि हमसे बराबर संपर्क बनी रहे और उनको आशीष मिलता रहे । (more…)

ज्ञान की प्राप्ति होने पर भी आप दुःख क्यों पाते हैं ?

ईश्वर जीव पर कृपा करते हैं किन्तु अज्ञानी जीव उसका दुरूपयोग करते हैं। इसलिए वह दुष्ट बन जाता है। जब ईश्वर के ज्ञान को व्यवहारिक जीवन में अपना कर जब आप जिंदगी जिएंगे तब उसी वक्त आपको स्थिरता प्राप्त होगी, आपको शांति प्राप्त होगी और आपको आनन्द प्राप्त होगा।

ज्ञान जब तक शब्दात्मक है, तब तक शान्ति नहीं मिलेगी। जब वह ज्ञान क्रियात्मक होगा , जब वह ज्ञान सक्रिय होगा तभी शान्ति मिलेगी, तभी आनन्द मिलेगा, तभी वास्तविक सुख की प्राप्ति होगी । इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह भगवान को प्राप्त कराने वाले भक्ति भाव के साधनों की क्रियात्मक शिक्षा ग्रहण करे।

इन्हीं साधनों से सर्वात्मा एवं भक्त को अपने आत्मा का दान करने वाले भगवान प्रसन्न होते हैं। (more…)