Author - Aadishri Arun

भगवान को क्या चाहिए, आइए ! भजन के माध्यम से सुनें ?

भगवान कल्कि जी का भजन सुनें और उनके चरणों में आश्रय लें। भगवान कल्कि जी के चरणों में आश्रय लेने के लिए नाम दर्ज कराएँ।
ईश्वर कहते हैं कि मैंने तुम्हें हवा दिया इसके लिए मैं तुमसे रूपये नहीं माँगता। अगर यदि मैं हवा ले लूँ तो तुम कितने घड़ी ऑक्सीजन का सिलेंडर लगाकर जीवित रह सकते हो। ईश्वर कहते हैं कि मैंने तुम्हें जल दिया इसके लिए मैं तुमसे रूपये नहीं माँगता। अगर यदि मैं जल ले लूँ तो तुम कितने घड़ी बिना जल के जीवित रह सकते हो। ईश्वर कहते हैं कि मैंने तुम्हें आग दिया इसके लिए मैं तुमसे रूपये नहीं माँगता। अगर यदि मैं आग ले लूँ तो तुम कितने घड़ी बिना आग के जीवित रह सकते हो। यदि तुम मेरी पूजा करोगे तो क्या इसके लिए मैं तुमसे रूपये मागुंगा ? तुम क्यों रूपये का कलेक्सन करते हो ? (more…)

परमेश्वर अवतार क्यों लेते हैं ?

परमेश्वर ने गीता ४:६ में कहा कि – अजन्मा और अविनाशीस्वरुप होते हुए भी तथा समस्त प्राणी का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योग माया से प्रकट हूँ। प्रश्न यह उठता है कि आखिर अवतार क्यों लेते हैं ? अवतार लेने के कई कारण हैं –

(१ ) जब -जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब – तब ही ईश्वर अपने रूप को रचते हैं अर्थात साकार रूप से लोगों के सामने प्रकट होते हैं। (गीता ४:७)

(२) साधु पुरुषों का उद्धार करने के लिए, पाप कर्म करने वालों को विनाश करने के लिए और धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करने के लिए ईश्वर युग – युग में प्रकट हुआ करते हैं।(गीता ४:८) (more…)

आध्यात्मिक जीवन में आप किस प्रकार प्रवेश करेंगे ?

हे परमेश्वर के अस्तित्व में विश्वास करने वाले लोगों ! जो परमेश्वर के साथ मेल कर लेता है, उसको हमेशा सुख की प्राप्ति होती है और जिसके हृदय में परमेश्वर बसता है वह जीवित ही मुक्ति को प्राप्त कर लेता है। परमेश्वर के शरणागत को कोई भी कष्ट नहीं होता है, उसको ताती हवा तक नहीं लगती, उसकी कृपा से दुःख नष्ट हो जाते हैं, रोग दूर हो जाते हैं और तृष्णा की अग्नि बुझ जाती है।

आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश करना बहुत ही सरल है, लेकिन इसके लिए कुछ आवश्यक बातें भी जानना जरूरी है कि उस व्यक्ति का रहन – सहन और मन का सोच कैसा हो जो आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश करना चाहते हैं । इसका वर्णन निम्न प्रकार है :- (more…)

परमेश्वर का स्मरण या नाम जप क्यों करें ?

कलियुग अर्थात कलि (सैतान) के शासन काल में परमेश्वर का स्मरण या परमेश्वर के नाम का जप या परमेश्वर के नाम का संकीर्तन ही भव सागर से पार जाने एक मात्र सरल उपाय है। जो फल सत्य युग में ध्यान करने से, त्रेता युग में बड़े – बड़े यज्ञ करने से और द्वापर युग में विधि पूर्वक पूजा करने प्राप्त होता है वही फल कलियुग में केवल परमेश्वर के नाम का जप या परमेश्वर के नाम का संकीर्तन या परमेश्वर का स्मरण करने से प्राप्त होता है। यूं तो चारों युगों में परमेश्वर के नाम का प्रभाव है किन्तु कलियुग में परमेश्वर के नाम का विशेष प्रभाव है। सभी धर्मग्रंथों में इस बात का वर्णन किया गया है। जिस प्रकार आग के बिना दीपक नहीं जलाया जा सकता ठीक उसी प्रकार परमेश्वर का स्मरण या परमेश्वर के नाम का जप या परमेश्वर के नाम का संकीर्तन किए बिना इस कलियुग में भव सागर से पार नहीं किया जा सकता है। परमेश्वर का नाम ही इस कलियुग में भव सागर से पार जाने के लिए सुदृढ़ जहाज है। (more…)