लोगों का उद्धार किस नाम से होगा ?
कलियुग में लोगों का उद्धार न तो राम नाम से होगा और न कृष्ण नाम से। द्वापर युग में भगवान कृष्ण पृथ्वी का परित्याग करने से पहले कहे कि – ” आज से सातवें दिन नई द्वारिका पानी में डूब जायगा।जिस क्षण मैं मर्त्य लोक का परित्याग कर दूंगा उसी क्षण इसके सारे मंगल नष्ट हो जायेंगे और थोड़े ही दिनों में पृथवी पर कलियुग का बोलबाला हो जायेगा। जब मैं पृथ्वी का त्याग कर दूँ तब तुम इस पर मत रहना क्योंकि कलियुग में अधिकांश लोगों की रूचि अधर्म में ही होगा।” (श्रीमद भागवतम महा पुराण ११;७:४-५ )
जब अर्जुन गोपियों को लेकर नई द्वारिका छोर कर जारहे थे तब रास्ते में साधारण भील ने गोपियों को लूट लिया और अर्जुन कुछ भी नहीं कर सका। यही अर्जुन महाभारत युद्ध के समय कुरुक्षेत्र के मैदान में बड़े – बड़े वीर योद्धाओं को नष्ट नावूद कर दिया था और सबको पशीना छुड़ा दिया था ; वही अर्जुन आज साधारण भील से गोपियों की रक्षा नहीं कर सका। (more…)
आशीर्वाद “अच्छा होने और ख़ुशी” का एक वयान है जो की दूसरे के लिए कहा जाता है जिसका संबन्द्ध उच्चरित किये गए अच्छे कामनाओं भरी शब्दों को पूरा होना है। परमेश्वर की मूल योजना यह थी कि उनकी सभी रचनाओं और मनुष्यों की उन्नति, शांति और सभी कामनाओं की पूर्ति हो परन्तु परमेश्वर की वह मूल योजना नष्ट हो गई जब संसार में पाप ने प्रवेश किया। वास्तव में आशीर्वाद का वयान परमेश्वर की कामना है जिसका अर्थ है उसके लिए अच्छाई को पुनः स्थापित करना या उसके अच्छाई के लिए घोषणा करना। वह परम आशीर्वाद यह है कि परमेश्वर आपको नया जीवन दिए हैं और उन्होंने आपके सभी गलतियों को माफ किये हैं जो कि ईश्वर पुत्र में विश्वास करने के कारण मिला है।
आज परमेश्वर की जो ख्वाईश है उसको ईश्वर पुत्र अरुण ने निम्न प्रकार से स्वर्णिम अक्षरों में वयान किया है :
परमेश्वेर की मनसा यह है कि जो लोग अन्त तक धीरज धरे रहेंगे उसी का उद्धार होगा। परमेश्वर जानते हैं कि अधर्म के बढ़ने से बहुत लोगों का प्रेम ठंढा हो जाएगा। इसलिए उन्होंने साफ – साफ लब्जों में कहा कि – “अधर्म के बढ़ने से प्रेम ठंढा हो जाएगा।परन्तु जो धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा।” (धर्मशास्त्र, मत्ती २४ :१३-१४)