क्या आप परमेश्वर की अनुभूति प्राप्त करना चाहते हैं ?
प्रेम एक निर्मल झरना है । उसके प्रवाह में जो भी आ जाता है, वह निर्मल हो जाता है । जिस प्रकार पात्र और कुपात्र की घृणा जैसे झरने के स्वच्छ प्रवाह में नहीं होती है ठीक वैसे ही प्रेमी के अन्त़करण में किसी प्रकार की ईर्ष्या – द्वेष या घृणा की भावनायें नहीं होती । महात्मा गाँधी जी अपने आश्रम में अपने हाथों से एक कोढ़ी की सेवा-सुश्रुषा किया करते थे । इसमें उन्हें कभी भी घृणा पैदा नहीं होती थी । प्रेम की विशालता में ऊपर से जान पड़ने वाली मलीनतायें भी वैसे ही समा जाती हैं जैसे हमारी नदियों का कूड़ा कबाड़ समुद्र के गर्भ में विलीन हो जाता है । प्रेम आत्मा के प्रकाश से किया जाता है । आत्मा यदि मलीनताओं से ग्रसित है तो भी उसकी नैसर्गिक निर्मलता में अन्तर नहीं आता । यही समझकर उदारमनसे व्यक्ति अपनी सहानुभूति से किसी को भी वंचित नहीं करते । (more…)
जो मनुष्य परमेश्वर की इच्छाओं के अनुसार चलता है वह हमेशा ही जीवित रहता है। इस बात को लोग सुनते तो हैं परन्तु अपने दैनिक जीवन में इसको उतारते नहीं हैं। इसलिए इस अमृत तुल्य बातों को सुनने के बाद भी लोगों को कोई लाभ नहीं मिलता है। आप देखते होंगे कि बहुत सारे परिवार हैं जो बर्वाद हो गए क्योंकि वे परमेश्वर की इच्छाओं के अनुसार नहीं चले और अपने घर को सांसारिक नीव पर खड़ा किये थे। थोड़ा सा प्रेसर पड़ा और वह गिरकर धरासाई हो गया। लेकिन जो व्यक्ति अपना घर परमेश्वर के नाम रूपी चट्टान पर बनाते हैं, उनका घर हमेशा स्थिर और सुरक्षित रहता है क्योंकि परमेश्वर सारी विपत्तिओं से आपकी रक्षा करते हैं । मैं आपको अमेरिका के एक परिवार की हकीकत वयान करता हूँ। एक आदमी बड़ा ही धर्मी और परमेश्वर का विश्वास योग्य था।
हे धूल में पड़े लोगों ! आज आपको ईश्वर का नाम अच्छा लगता है और आप ईश्वर की बातें सुनना चाहते हैं इसका कारण यह है कि आपको ईश्वर ने चुन लिया है। आप सबसे बलवान नहीं हैं , आप सबसे बुद्धिमान नहीं हैं ,आप सबसे धनवान नहीं हैं फिर भी आपको परमेश्वर ने इसलिए चुना है कि ताकि आप बलवानों के सिर को निचा कर दें, बुद्धिमानों के सिर को निचा कर दें और धनवानों के सिर को निचा कर दें। आप इस योग्य बनें ताकि परमेश्वर आपके आगे – आगे अगुवाई करता हुआ चलें और आपके पीछे भी रक्षा करता चलें। परमेश्वर ने मनुष्य से यह प्रतिज्ञा किया कि मैं तुम्हारे आगे – आगे अगुवाई करता हुआ चलूँगा और तुम्हारे पीछे भी रक्षा करता चलूँगा ।
तुमने बहुत पूजा किया। तुमने बहुत भजन गाया। तुम्हारे भजन में बहुत दर्द भरे हुए थे। तुम्हारा भजन मुझको बहुत अच्छा लगा। लेकिन सबाल यह उठता है कि क्या भगवान ने तुम्हारी सुनी या नहीं ? बहुत सारे भजन हमारे और आपके सामने है जिसको लोगों ने बड़ा प्रेम से गाया और समाज के बहुत लोगों ने उसे पसंद किया। अधिकतर भजन में ईश्वर के सामने लोगों ने प्रस्ताव रखा कि आप हमको भूल गए हैं, आप हमारी कब सुनेंगे, आप हमारी लाज बचाओ, बीच भँवर में पड़ा हूँ और कोई बचाने वाला नहीं है, हम मर रहे हैं, हमारी रक्षा करने आप कब आओगे इत्यदि – इत्यादि। इसका क्या अर्थ है ? आपका संबन्ध भगवन से टूट चुका है इसलिए तो आप भगवान के आगे इस तरह के भाव को प्रकट करते हो।
अनन्य भक्ति के द्वारा भगवान का प्रत्यक्ष दर्शन आप कर सकते हैं। (गीता ११:५४) लेकिन अनन्य भक्ति में प्रेम की मौजूदगी भी आवश्यक है। क्योंकि बिना प्रेम का भक्ति सिद्ध नहीं होती। भगवान को जो प्रेम से पुकारता है, उसके समक्ष वे अवश्य ही प्रकट होते हैं। भगवान का दर्शन प्राप्त करने के लिए ६ चीजों को अपनाना अनिवार्य है :