परमेश्वेर की मनसा क्या है ? – ईश्वर पुत्र अरुण
परमेश्वेर की मनसा यह है कि जो लोग अन्त तक धीरज धरे रहेंगे उसी का उद्धार होगा। परमेश्वर जानते हैं कि अधर्म के बढ़ने से बहुत लोगों का प्रेम ठंढा हो जाएगा। इसलिए उन्होंने साफ – साफ लब्जों में कहा कि – “अधर्म के बढ़ने से प्रेम ठंढा हो जाएगा।परन्तु जो धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा।” (धर्मशास्त्र, मत्ती २४ :१३-१४)
परमेश्वऱ ने यह भी कहा कि “मेरे नाम के कारण सब लोग तुमसे बैर करेंगे पर जो अंत तक धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा।” (धर्मशास्त्र, मत्ती १०:२२) मैं तुमसे सच कहता हूँ कि संसार और उसकी अभिलाषाएँ दोनों मिट मिटजाएँगे पर जो परमेश्वेर की इच्छा पर चलेगा , वह सर्वदा बना रहेगा। (धर्मशास्त्र, (more…)
क्या आपने सोचा है कि आपके मन में गुस्सा व क्रोध क्यों उत्पन्न होता है ?
परमेश्वर ने सारी रचना को रचने के बाद सबसे अंत में मनुष्य को बनाया और उनसे कहा सुनो –