आसानी से आप परमेश्वर को कैसे प्राप्त करेंगे ?

जो मनुष्य परमेश्वर में अनन्य चित्त होकर सदा ही निरन्तर परमेश्वर को स्मरण करता है उस नित्य – निरन्तर परमेश्वर में युक्त हुए मनुष्य को परमेश्वर आसानी से प्राप्त हो जाते हैं। गीता ८:१४ में इस बात की घोषणा परमेश्वर ने अपने मुख से किया है।

गीता ८:८-१३ वें श्लोक तक सगुन – निराकार और निर्गुण – निराकार का स्मरण करना बताया गया है। इन दोनों स्मरणों में प्राणायाम की मुख्य विशेषता दर्शायी गई है जिसको सिद्ध करना कठिन है। अन्तकाल जैसी विकट अवस्था में भी प्राणायाम बल से प्राणों को दोनों भौं के मध्य में स्थापित करने की जो बात गीता ८:६, १०, १२ – १३ में कही गई है ऐसा करना प्रत्येक मनुष्य के लिए काफी कठिन है। क्योंकि अन्तकाल की अवस्था में मृत्यु भय की सत्ता (more…)

ब्रह्म-ज्ञान

ब्रह्म – ज्ञान सबसे हाइयेष्ट क्वालिटी का ज्ञान है। इसको जान लेने के बाद संसार में और कोई भी ज्ञान जानने के लिए शेष नहीं रह जाता है। ब्रह्म – ज्ञान सब विद्द्याओं का राजा, सब गोपनीयों का राजा, अति पवित्र, अति उत्तम, प्रत्यक्ष फल वाला, धर्मयुक्त, साधन करने में बड़ा सुगम और अविनाशी है। ब्रह्म-ज्ञान ही मोक्ष प्राप्ति का एक मात्र उपाय है। मोक्ष की प्राप्ति के लिए और दूसरा कोई उपाय नहीं है। ब्रह्म -ज्ञान कोई कर्म नहीं है। उस परब्रह्म को जानकर ही मनुष्य जन्म – मरण को लाँघ जाता है। ब्रह्म-ज्ञान व ब्रह्म -विद्द्या का मुख्य फल परब्रह्म की प्राप्ति है जो जन्म, जरा आदि विकारों को न प्राप्त होने वाला, अजर-अमर, समस्त पापों से रहित तथा कल्याणमय दिव्यगुणों से सम्पन्न है। (more…)

अन्त के दिनों में परमेश्वर अपनी आत्मा आप पर क्यों उड़ेलना चाहते हैं ?

परमेश्वर ने कहा कि अन्त के दिनों में मैं अपनी आत्मा सब मनुष्यों पर उड़ेलूंगा। (धर्मशास्त्र, प्रेरितों के काम २:१७) क्योंकि उस समय लोग निर्बुद्धि और आज्ञा को न मानने वाले हो जाएंगे, वे भ्रम में पर जाएँगे और तरह – तरह के अभिलाषाओं और सुखविलास के भोगी होजाएंगे। लोग सबको बदनाम करने वाले हो जाएंगे और झगड़ालू होजाएंगे। वे मूर्खता के विवादों, बैर विरोध और झगड़ों में व्यर्थ समय को वरवाद करेंगे। यहाँ तक कि लोग परमेश्वर के वचनों की निन्दा करने वाले हो जायेंगे। इसलिए परमेश्वर ने कहा कि अन्त के दिनों में मैं अपनी आत्मा सब मनुष्यों पर उड़ेलूंगा। तुम्हारे बेटे और तुम्हारी बेटियाँ भविष्यवाणी करेंगी, तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे और तुम्हारे पुरनिए स्वप्न देखेंगे। जब तुम्हारे अन्दरपरमेश्वर की आत्मा बसेंगे तब तुम शारीरिक दशा में नहीं बल्कि आत्मिक दशा में हो जाओगे। क्योंकि यदि किसी में परमेश्वर की आत्मा नहीं है तो वह परमेश्वर का जन नहीं है । जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं उनके लिए सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है।

क्योंकि जिसने परमेश्वर को पहले से जान लिया है उन्हें पहले से ठहराया भी है, उन्हें बुलाया भी है और उन्हें धर्मी भी ठहराया है और उन्हें महिमा भी दी है। महिमा मनुष्य के स्वयं के कामों के द्वारा नहीं मिलती है बल्कि महिमा परमेश्वर से मिलती है। (more…)