परमेश्वर ने मनुष्य को जीवन देने का वादा क्यों किया ?
परमेश्वर ने जितने चीजों को बनाया उस सबको देखा कि सब अच्छा है किन्तु परमेश्वर की नजर में सभी रचनाओं में से सबसे अच्छी रचना मनुष्य था। परमेश्वर ने उस मनुष्य को आदम कहा। इसके बाद परमेश्वर ने सोचा कि आदम को अकेला रहना अच्छा नहीं है इसलिए उसके लिए मैं एक सहायक बनाऊँगा जो उससे मेल खाए। इसलिए परमेश्वर ने आदम का एक पंसुली निकाल कर उसमें मांस भर दिया और उसको स्त्री बना दिया और आदम के पास ले आया। आदम ने कहा कि चुकि यह मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे मांस का मांस है इसलिए इसका नाम नारी होगा। लेकिन परमेश्वर की नजर में जो परमेश्वर का सबसे अच्छी रचना थी उसने एक आजादी के लिए परमेश्वर की आज्ञा को तोड़ दिया। परमेश्वर की आज्ञा को तोड़ने के कारण ही मनुष्यों के ऊपर दुःख (more…)
भगवान कल्कि जी का भजन सुनें और उनके चरणों में आश्रय लें। भगवान कल्कि जी के चरणों में आश्रय लेने के लिए नाम दर्ज कराएँ।
परमेश्वर ने गीता ४:६ में कहा कि – अजन्मा और अविनाशीस्वरुप होते हुए भी तथा समस्त प्राणी का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योग माया से प्रकट हूँ। प्रश्न यह उठता है कि आखिर अवतार क्यों लेते हैं ? अवतार लेने के कई कारण हैं –
हे परमेश्वर के अस्तित्व में विश्वास करने वाले लोगों ! जो परमेश्वर के साथ मेल कर लेता है, उसको हमेशा सुख की प्राप्ति होती है और जिसके हृदय में परमेश्वर बसता है वह जीवित ही मुक्ति को प्राप्त कर लेता है। परमेश्वर के शरणागत को कोई भी कष्ट नहीं होता है, उसको ताती हवा तक नहीं लगती, उसकी कृपा से दुःख नष्ट हो जाते हैं, रोग दूर हो जाते हैं और तृष्णा की अग्नि बुझ जाती है।