ज्ञान की प्राप्ति होने पर भी आप दुःख क्यों पाते हैं ?

ईश्वर जीव पर कृपा करते हैं किन्तु अज्ञानी जीव उसका दुरूपयोग करते हैं। इसलिए वह दुष्ट बन जाता है। जब ईश्वर के ज्ञान को व्यवहारिक जीवन में अपना कर जब आप जिंदगी जिएंगे तब उसी वक्त आपको स्थिरता प्राप्त होगी, आपको शांति प्राप्त होगी और आपको आनन्द प्राप्त होगा।

ज्ञान जब तक शब्दात्मक है, तब तक शान्ति नहीं मिलेगी। जब वह ज्ञान क्रियात्मक होगा , जब वह ज्ञान सक्रिय होगा तभी शान्ति मिलेगी, तभी आनन्द मिलेगा, तभी वास्तविक सुख की प्राप्ति होगी । इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह भगवान को प्राप्त कराने वाले भक्ति भाव के साधनों की क्रियात्मक शिक्षा ग्रहण करे।

इन्हीं साधनों से सर्वात्मा एवं भक्त को अपने आत्मा का दान करने वाले भगवान प्रसन्न होते हैं। (more…)

परमेश्वर की प्राप्ति में निष्काम प्रेम की क्या भूमिका है ?

जो परमेश्वर से प्रेम करता है, परमेश्वर उसी को अपना मान बैठते हैं। और परमेश्वर जिसको अपना मानते हैं केवल उसी को अपना असली रूप दिखाते हैं। कली के शासन काल में परमेश्वर ने अपना नाम आप लोगों के आगे तो प्रकट कर रखा है परन्तु अपना रूप छिपा रखा है। जब आप परमेश्वर की प्रेम सहित भक्ति करेंगे तब परमेश्वर आप को अपने स्वरूप का दर्शन कराएँगे। इसलिए गीता में अनेक जगह परमेश्वर के दर्शन के लिए प्रेम – भक्ति दोनों का जिक्र किया गया है।

यह अक्षरः सत्य है कि यदि आप ज्ञानी हैं परन्तु आप परमेश्वर से प्रेम नहीं करते हैं तो आप परमेश्वर के स्वरूप का दर्शन नहीं कर सकते हैं। यहाँ तक कि आप परमेश्वर का अनुभव भी नहीं कर सकते हैं। इस बात को याद रखें कि मांगने से प्रेम की धारा टूट जाती है, प्रेम का प्रमाण घटने लगता है। (more…)

परमेश्वर किस प्रकार प्रसन्न होंगे ?

मनुष्य का परमेश्वर के ऊपर विशवास रखना तथा परमेश्वर का विश्वासयोग्य बनना ये ही मुख्य दो चीज हैं जिससे परमेश्वर को प्रसन्न किया जासकता है। परमेश्वर को प्रसन्न किये बिना उनसे कुछ भी प्राप्त नहीं किया जा सकता है। लोग तप करते हैं किस लिए ? परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए। लोग यज्ञ करते हैं किस लिए? परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए। लोग संकीर्तन करते हैं किस लिए? परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए। लोग दान हैं किस लिए ? परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए।लेकिन मनुष्य ने कभी भी यह खोज नहीं किया कि ईश्वर किस प्रकार प्रसन्न होंगे। उसने समाज में जो देखा, अपने पूर्वजों और बाप-दादाओं को जो करते देखा, उसी को एक मात्र उत्तम साधन मान लिया और वैसा ही करने लगा। उसने तत्वदर्शी ज्ञानी पुरुष से पूछना आवश्यक ही नहीं समझा जबकि परमेश्वर के बारे में ठीक – ठीक केवल तत्वदर्शी ज्ञानी पुरुष ही बता सकते हैं। (more…)

ईश्वर आपकी क्यों नहीं सुनते हैं ?

लोगों ने ईश्वर के साथ जो वाचा बाँधी थी (जो एग्रीर्मेंट किया था ) उसको तोड़ दिया। इसके कारण मनुष्य के जीवन और आराधना में लापरवाही और विकृति आगयी। लोग ईश्वर के शिक्षाओं के अनुकूल न जीकर ईश्वर को धोखा दे रहे हैं । इसलिए ईश्वर अपने लोगों का न्याय करने के लिए एक दिन निश्चित किया जिसको न्याय का दिन कहते हैं। न्याय का वह दिन प्रकट होने से पहले लोग अपने आप में सुधार कर ले इसके लिए मैं ईश्वर पुत्र अरुण सम्पूर्ण मानव जाति को सावधान करता हूँ। (more…)