प्रभु कल्कि आपको बुला रहे हैं
ईश्वर ने अपने पुत्रों को कभी भी अपने से अलग करना नहीं चाहा। उसने मनुष्यों को इसलिए रचा ताकि ताकि वे ईश्वर के हमेशा साथ रहे । वे चाहते थे मनुष्य हमेशा मुझसे रिलेशनशिप बनाये रखे और उनके तथा ईश्वर के बीच एक ऐसा रिलेशनशिप बन जाय ताकि वे ईश्वर से कभी भी अलग न हो सके । किन्तु शैतान ने मनुष्य को भरमा दिया और मनुष्य शैतान का कहना मानने के कारण ईश्वर से दूर हो गया । ईश्वर के द्वारा जो उसको अनन्त जीवन मिलना था उससे वह वंचित रह गया। यही कारण है कि मनुष्यों की मृत्यु होने लगी ।
अब मनुष्य दुखों की बदियों से गुजरने लगा, वह मृत्यु के वादियों से होकर गुजरने लगा और इन सब को देख कर उनके मन में भय समा गया । सबसे पहली बार भय या डर ईश्वर को छोड़ते ही उनके अन्दर समा गया। इससे पहले वे नहीं जानते थे कि भय किसको कहते हैं या डर किसको कहते हैं।
आज ईश्वर मनुष्य को मृत्यु से बचाने धरती पर कल्कि नाम से आये हैं और अपने पुत्रों को ढूँढ रहे हैं । वे अपने पुत्रों को अनन्त जीवन देने के लिए आए हैं ताकि मनुष्यों को मृत्यु से छुटकारा मिले । वे बाहें फैला कर अपने पुत्रों को ढूँढ रहे हैं। वे इन्तजार कर रहे हैं की उनका पुत्र उनके बाँहों में वापस आ जाय । (more…)
लोगों का कलियुगी संस्कार है, 1 % लोग अपवाद में आते हैं कीचड़ में कमल भी खिलते हैं । आज जिस संस्कार में लोग जी रहे हैं उस संस्कार के अनुसार भारतीय सभ्यता बिल्कुल ही खतम हो चुका है । आज के लोगों का सोच का जो समीकरण है वह साफ विपड़ित है । पहले लोगों में 100 % Honesty थी अब 100 % बेईमानी है । जब बच्चे की नौकरी लगाती है तो लोग या रिश्तेदार सबसे पहले पूछते हैं कि ऊपरी कमाई कितना है ? पहले लोगों में दया की भावना थी, अब लोगों में बात – बात पर झगड़ा करने की रूचि है। पहले एक परिवार में 15 – 15 आदमी बड़े सुख – चैन से रहते थे पर अब माँ – बाप और दो बच्चे भी सुख – चैन से नहीं रहते । पहले बहु अपने से बड़ों को इज्जत Respect देती थी, अपने सास – ससुर को Respect देती थी और आज उनके जेहन में Respect नाम का कोई चीज ही नहीं रहा । पहले बेटा अपने से बड़ों को और अपने माता – पिता को Respect देता था और आज उनके जेहन में Respect नाम का कोई चीज ही नहीं रह गया ।
दया भरे लघु काम हमारे