Author - Aadishri Arun

परमेश्वर की क्या आज्ञा है ?

परमेश्वर चाहते हैं कि तुम परमेश्वर से ज्ञान और बुद्धि प्राप्त करो क्योंकि बुद्धि तेरी रक्षा करेगी। तुम बुद्धि से प्रीति रखो क्योंकि वह तेरा पहरा देगी। बुद्धि श्रेष्ट है इसलिए उसकी प्राप्ति के लिए यत्न करो । उसकी बड़ाई करो तो वह तुझको बढ़ाएगी। जब तू उससे लिपट जाओगे तब वह तेरी महिमा करेगी। वह तेरे सिर पर शोभायमान आभूषण बांधेगी। तू बुद्धि को प्राप्त करो और समझ को भी प्राप्त करो । उनको भूल न जाना और न परमेश्वर की बातों को छोरना। परमेश्वर ने तुझे बुद्धि का मार्ग बताया है और सिधाई के पथ पर चलाया है ताकि चलने में तुझे कोई रोक – टोक न हो, चाहे तू दौड़े तो भी ठोकर न खाये। आज्ञा तो दीपक है और शिक्षा ज्योति, और सिखाने वाले की डांट जीवन का मार्ग है। परमेश्वर ने कहा कि चुकि तू मेरा बहुत प्रिय है, इसलिए मैं तुझसे परम हितकारक वचन कहूँगा। जो बुद्धि को प्राप्त करता है वह अपने प्राण का प्रेमी ठहरता है और जो समझ को धरे हुए है उसका कल्याण होता है।

जो मनुष्य बुद्धि को धारण करता है वह विलम्ब से क्रोध करता है और वह जयजयकार पाकर आनन्दित होता है। हर बुद्धिमान स्त्री अपने घर को बनाती है और मूढ़ स्त्री उसको अपने हाथों से डाह देती है। बुद्धिमान अपने वचनों के द्वारा रक्षा पाते हैं। इसलिए तू बुद्धिमानों की संगति करो तो तू भी बुद्धिमान होजाअोगे । जो मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है, उसको वे बुद्धि, ज्ञान और आनंद देते हैं । परन्तु पापी को दुःख भरा काम ही देते हैं । यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो तो वह परमेश्वर से मांगे जो बिना उलाहना दिए सबको उदारता से देता है। परन्तु विश्वास से मांगो और कुछ संदेह न करो क्योंकि संदेह करने वाला समुद्र के लहरों के समान है जो हवा से बहती और उछलती है। हे मेरे भाई ! धोखा न खाओ क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर से ही मिलता है जिसमें न तो कोई परिवर्तन होसकता है और न अदल बदल। जो ऊपर से है वह सर्वोत्तम है और जो धरती का है वह नाशवान है। तुम अपना विश्वास अपने कर्मों के द्वारा दिखाओ ।

परमेश्वर आपके जीवन में देने वाली वस्तु का लिस्ट बनाये हैं

मनुष्य को उतपन्न करने से पहले परमेश्वर ने बहुत सारी चीजों की रचना की और उसे मनुष्य के आधीन कर दिया ताकि मनुष्य सुख से रहे। लेकिन परमेश्वर ने मनुष्य को रोते विलखते हुए देखा। उसने मनुष्य को आंशू बहाते हुए देखा। उसने मनुष्य को मृत्यु के वादियों से गुजरते हुए देखा। तब उन्होंने स्वयं को मनुष्य वेश में रचा और आपसे मिलने के लिए धरती पर आया। उन्होंने पुकार – पुकार कर कहा – तुम व्याकुल मत हो। तुम मेरा कहना मानो, मेरे पास आओ तो तुम जीवित रहोगे। मैंने तुम्हें रोने के लिए नहीं रचा। मैंने तुम्हें आंशू बहाने के लिए नहीं रचा। मैंने तुम्हें शोक करने के लिए नहीं रचा। मैं तुम्हारे शोक को आनंद में बदल दूंगा। (more…)

हम ध्यान क्यों करें ?

ध्यान ही परम धर्म है, ध्यान ही परम शुद्धि है। इसलिए मनुष्य को ध्यान परायण होना चाहिए। प्रति दिन ध्यान करने से जो लाभ प्राप्त होते हैं वे निम्नलिखित हैं :-
(१) ध्यान करने वाले मनुष्य के प्राण वायु की दिशा ऊर्ध्व अर्थात ऊपर की ओर हो जाती है जिससे मृत्यु के समय जीव को शरीर का त्याग करते समय कोई कष्ट नहीं होता है। सामान्य मनुष्य को मृत्यु के समय शरीर का त्याग करते वक्त इतनी पीड़ा होती है जैसे हजार बिच्छु एक साथ डंक मार दिए हों।
(२) इस लोक में और परलोक में मनुष्य के लिए जो कुछ दुर्लभ है, जो मन से सोचा भी नहीं जासकता है, वह सब बिना मांगे ही ध्यान करने वालों को मिल जाता है।
(३) पाप करने वालों की शुद्धिकरण हेतु ध्यान के समान कोई और अन्य दूसरा साधन नहीं है।
(४) ध्यान पुनर्जन्म देने वाले कारणों को भष्म करने वाली योगाग्नि है।
(५) दुःख – सागर को पार करने के लिए ध्यान ही सर्वोत्तम साधन है। इससे अच्छा साधन कुच्छ भी नहीं है। (more…)

मरने के बाद क्या होगा ?

मृत्यु बहुत ही खराब चीज होती है। मृत्यु का भय सभी को है। चाहे वह गरीब हो या अमीर, बलवान हो या निर्बल, नास्तिक हो आस्तिक, पंडित हो या काजी। मृत्यु के आगे किसी का भी वश नहीं चलता है। जब मृत्यु का समय आता है तब किसी को भी पता नहीं चलता है कि वह कब आया और जीव को कहाँ ले गया ? इसके आने का कोई निश्चित समय नहीं होता है। वह बहुत ही बलवान है, वह बहुत ही सामर्थ्यवान है। वह सबके बीच में से जीव को बलपूर्वक उठा कर इस प्रकार ले जाता है कि किसी को भी यह पता नहीं चल पाता कि वह जीव को कहाँ ले गया ? उसके आगे सभी घुटना टेक देता है। (more…)

मनुष्य के साथ ईश्वर की प्रतिज्ञा

ईश्वर धरती पर अवतार लेकर अपने नए नाम कल्कि नाम से आए। उन्होंने मनुष्य से प्रतिज्ञा किया कि मैं तुम्हें वो हर चीज दूंगा जो तुम्हारे लिए परम हितकारक है। वह परम हितकारक चीज क्या है जिसके लिए परमेश्वर ने मनुष्य से वादा किया है :-
(१) निश्चित ही मैं तुम्हारी वीमारी और दुःख को दूर किया करूंगा ।
(२) निश्चित ही मैं तुम्हें मुक्ति का मार्ग बताऊँगा क्योंकि मैं तुम में से हर एक से बहुत प्यार करता हूँ ।
(३) इस संसार में तुम्हें बहुत से कष्ट आएंगे परन्तु वे तुम्हें नुक्सान नहीं पहुंचाएंगे ; क्योंकि मैंने संसार को जीत लिया है।
(४) मत डर क्योंकि तेरी आशा फिर नहीं टूटेगी। मत घबरा क्योंकि तू फिर लज्जित न होगा और तुझपर स्याही न छायेगी। (more…)