पवित्र बनो क्योंकि परमेश्वर पवित्र हैं
परमेश्वर कल्कि नाम से भारत के पूण्य भूमि पर अवतरित हुए हैं। वे नहीं चाहते हैं कि लोग पाप में जिएँ इसलिए उन्होंने लोगों से कहा कि तुम पवित्र बनो क्योकि मैं पवित्र हूँ। यह स्पष्ट है कि लोगों के जीवन और अराधना में लापरवाही और विकृति आ गई है। याजक और जन – साधारण दोनों ही परमेश्वर के शिक्षा के अनुकूल जीवन न जी कर उन्हें धोखा दे रहे हैं। मनुष्यों ने परमेश्वर के साथ जो वाचा बाँधी थी (संकल्प किया था) उसको तोड़ दिया। इसलिए परमेश्वर ने मनुष्यों से स्पष्ट कहा कि तुम मेरे आज्ञाओं को मानना, मेरे आज्ञाओं का पालन करना और मेरे को अपवित्र न ठहराना क्योंकि मैं तुम्हारा पवित्र करने वाला हूँ। (more…)
परमेश्वर के हजारों आँखें हैं। परमेश्वर के हजारों कान हैं। सारी सृष्टि उन्हीं के अन्दर समाई हुई है और सभी जीवों में केवल उन्हीं एक परमात्मा की आत्मा बसती है। इसलिए आपके प्रत्येक दुःख – दर्द और प्रत्येक पड़ेशानी को वे जानते हैं। उनसे कोई भी चीज छिपी नहीं है। वे बहुत ही सामर्थ्यवान हैं। वे बहुत ही शक्तिशाली हैं । वे आपके दुखों को आनंद में बदल सकते हैं। वे आपके पड़ेशानियों को आनंद में बदल सकते हैं। वे आपके आँशुओं को आशीष की बरसात में बदल सकते हैं। वे परमेश्वर दुखी व्यक्ति को तुच्छ नहीं मानते और न उससे घृणा करते हैं और न वे उससे वे मुख छिपाते हैं पर जब किसी ने भी उनको पुकारा उनकी उन्होंने सुन ली। (धर्मशास्त्र, भजन संहिता २२ :२४ ) अब सबाल यह उठता है कि
जो मनुष्य परमेश्वर के इच्छाओं के अनुसार चलता है वह हमेशा जीवित रहता है। आज मैं आपको इस भूली हुई बातों को याद दिलाने आया हूँ। संसार से जो सुख आपको मिलता है वह टेम्प्रोरी सुख है। इस सत्य को याद रखना और दैनिक जीवन में इसको उतारना दोनों आवश्यक है। जो व्यक्ति सुनता तो है परन्तु दैनिक जीवन में इसको नहीं उतारता है उस सत्य को जानने से कोई लाभ नहीं होता है । यदि कोई मनुष्य सांसारिक सुख को त्याग कर परमेश्वर की इच्छाओं को पूरा करता है तो वह निश्चित ही अनंत जीवन के सुख को भोग पाएगा।
आज ९० % घरों में परमेश्वर की पूजा नहीं होती। लोग अपने जीवन में काम को ही महत्व देते हैं। वे बिना पूजा किये ही घर से बहार निकलते हैं और इसका परिणाम यह होता है कि कार्य स्थल पर उन्हें दिनभर बिलकुल अराजकता का सामना करना पड़ता है। उनकी मानसिक शांति भंग हो जाती है। उनके काम करने की इच्छा मर जाती है लेकिन घर गृहस्ती के बोझ तले दबा होने के कारण ऐसी विषम परिस्थितियों में भी उन्हें काम करना ही पड़ता है। जब वे थक कर चुड़ हुए घर में आते हैं तो घर के सदस्यों के बीच में करवाहट सुनने को मिलती है। घर के बच्चे माँ – बाप का कहना नहीं मानते जिसकारण नहीं चाहने के वावजूद भी बच्चों का जीवन बर्वाद होते हुए उन्हें देखना पड़ता है। अंत में उन्हें समझ में नहीं आता है कि क्या करें ? उनकी समस्याओं को बढ़ाने वाले लोगों की कमी नहीं है परन्तु उनकी समस्याओं को